जिम्मेदार भले ही अपनी जिम्मेदारी भूल गए। यमुना डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर आंखें मूंदे रहे लेकिन पानी अपना रास्ता नहीं भूलता। यमुना में आई बाढ़ से कैलाश, दयालबाग, बल्केश्वर, जीवनी मंडी व ट्रांस यमुना तक जिन इलाकों में पानी भरा, उन क्षेत्रों में मुड्ढियां लगने के बाद निर्माणों की शामत आ सकती है।
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यमुना डूब क्षेत्र में निर्माण प्रतिबंधित है। उल्लंघन की शिकायत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सिंचाई विभाग को डूब क्षेत्र में मुड्ढियां लगाने के आदेश दिए हैं। 6 से 21 सितंबर तक असगरपुर से प्रयागराज तक 21 हजार से अधिक मुड्ढियां लगाने की टेंडर प्रक्रिया पूरी होनी है। यह बात, मुख्य अभियंता रामगंगा कमांड ने एनजीटी में दायर हलफनामे में कही है। 6 अक्तूबर तक मुड्ढियां गाढ़ने का काम शुरू होगा।
याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि जिले में यमुना करीब 80 किमी बहती है। कीठम झील, रुनकता से कैलाश, दयालबाग, बल्केश्वर होते हुए फतेहाबाद व बाह तक 167 वर्ग किमी डूब क्षेत्र है। सबसे ज्यादा अवैध निर्माण दयालबाग क्षेत्र में हुए। शहर में करीब 15 किमी यमुना डूब क्षेत्र है।
विशेषज्ञ समिति ने किया है निर्धारण
यमुना डूब क्षेत्र का निर्धारण केंद्रीय जल आयोग व नदी संरक्षण निदेशालय ने 6 सदस्य विशेषज्ञ समिति से कराया है। हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की फ्लड मैपिंग एंड रिस्क असेसमेंट शाखा के विभागाध्यक्ष डॉ. एवी सुरेश बाबू ने 100 साल में आई बाढ़ व सेटेलाइट रिपोर्ट के आधार पर डूब क्षेत्र के अक्षांश व देशांतर निर्धारित कराए हैं। इधर, पिछले 15 साल में एडीए और सिंचाई विभाग ने 500 मीटर का दायरा मानते हुए एनओसी और नक्शे पास भी कर दिए। ऐसे में नक्शा पास व एनओसी जारी करने वाले अफसर फंसेंगे।
ठंडे बस्ते में पड़ा मामला
एनजीटी के आदेश पर यमुना डूब क्षेत्र में दयालबाग में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला था। तब एक दर्जन से अधिक निर्माण एडीए ने ध्वस्त कराए थे। आरोप लगाए गए कि सिक्कों की खनक से कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। सत्ता के संरक्षण में रसूखदार लोगों ने डूब क्षेत्र में अपार्टमेंट, फार्म हाउस, कॉलोनी, रिसोर्ट से लेकर अन्य निर्माण खड़े कर लिए।