आगरा में यमुना का जलस्तर भले ही उतरने लगा हो, लेकिन व्यापारियों की चिंता खत्म नहीं हुई है। बेलनगंज-मोतीगंज क्षेत्र के निचले इलाके के अधिकांश गोदाम से खाद्य सामग्री हटा दी गई है। बाढ़ को देखते हुए व्यापारियों ने खाद्यान्न के ऑर्डर सप्ताहभर के लिए रोक दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि 1978 की बाढ़ में करोड़ों रुपये का नुकसान झेल चुके हैं।
श्री मोतीगंज खाद्य व्यापार समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद मंगल ने बताया कि मोतीगंज में 200 से अधिक खाद्य व्यापारी हैं। इनके 25 से अधिक बड़े गोदाम हैं। यहां से आसपास के जिलों में भी व्यापार होता है। बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। इससे चीनी, मसाले, दाल, चावल के ऑर्डर कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिए हैं।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष गिरिराज अग्रवाल ने बताया कि बेलनगंज और मोतीगंज में चीनी, दाल, चावल के बड़े गोदाम अधिक हैं। थोड़ा पानी घुसने पर भारी नुकसान होगा। 1978 की बाढ़ में गोदामों में पानी भरने से व्यापारियों का करोड़ों का सामान बर्बाद हो गया था। ऐसे में अभी सप्ताहभर के लिए खाद्यान्न के ऑर्डर स्थगित किए हैं।
ट्रांसपोर्टर बलवीर प्रसाद ने बताया कि बेलनगंज क्षेत्र में 25-30 ट्रांसपोर्टर के गोदाम हैं। इनमें जूता, खाद्य सामग्री समेत अन्य को रखा जाता है। बाढ़ का पानी रास्ते में आ गया है, ऐसे में यहां से सामान को शिफ्ट करा रहे हैं। प्रशासन की ओर से खतरा पूरी तरह से टलने के बाद ही गोदामों में माल रखा जाएगा।
हाथी घाट पुल के नीचे बनाएं वैकल्पिक मार्ग
समाजवादी पार्टी के नेता शब्बीर अब्बास ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को दौरा कर हाथी घाट पुल के नीचे वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि पुल के नीचे पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इमरजेंसी वाहनों की भी सुविधा क्षेत्र में रहने वालों को नहीं मिल पा रही है। उन्होंने जलभराव वाले स्थानों से पंप लगाकर पानी निकालने की मांग की है।