जिला और केंद्रीय कारागार का निरीक्षण करने आए पुलिस महानिदेशक -महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं आनंद कुमार से बुजुर्ग बंदियों ने रिहाई की गुहार लगाई।
केंद्रीय कारागार में बुजुर्ग बंदियों ने कहा कि पात्र होने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। वहीं 12 बंदियों का रिहाई आदेश नहीं आ रहा है। डीजी ने जेल अधिकारियों से जानकारी ली और बंदियों को रिहाई के लिए जरूरी कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
डीजी आनंद कुमार सुबह 11 बजे जिला कारागार पहुंचे। उन्होंने जिला जेल में बंदियों से बात की। बैरकों, हॉस्पिटल और पाकशाला को देखा। उन्होंने जेल की व्यवस्था पर संतोष जाहिर किया। दोपहर 1:15 बजे वह केंद्रीय कारागार पहुंचे। तकरीबन 3:30 बजे तक रहे। इस दौरान बुजुर्ग बंदियों ने डीजी के सामने अपनी समस्या रखी।
कारागार में 12 बंदियों की समस्या थी कि पात्र होने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो पा रही। पूर्व में शासन के आदेश पर 26 जनवरी के बाद 223 बंदियों को रिहा किया जा चुका है। मगर, उनका रिहाई आदेश नहीं आ रहा। अन्य बुजुर्ग बंदियों ने भी रिहाई की मांग की।
आनंद कुमार ने कारागार की फैक्टरी का निरीक्षण भी किया। डीजी कहा कि जिला कारागार में सुधार के कई कार्य किए हैं। मशीन से रोटी उपलब्ध कराई जा रही हैं। ई प्रिजन सिस्टम लगाया गया है। इससे बंदियों को तारीखों की जानकारी मिल रही है। लाईब्रेरी भी खोली गई है।
बागपत जेल में पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी के हत्याकांड के मामले में डीजी ने कहा कि अभी और कार्रवाई होनी बाकी है। रिपोर्ट दी जा चुकी है। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह की अध्यक्षता वाली जेल सुरक्षा समिति की रिपोर्ट शासन में विचाराधीन है। इसमें कई उल्लेखनीय तथ्य हैं।
डीजी आनंद कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश की जेलों की क्षमता 58 से 59 हजार बंदियों की है। लेकिन एक लाख से अधिक बंदी रह रहे हैं। इसके बावजूद बंदियों के अधिकारों का ध्यान रखा जा रहा है। मानकों के अनुसार ही उन्हें रखा गया है।
बंदियों के मोबाइल से बने वीडियो वायरल होने और मोबाइल से फिरौती मांगे जाने के सवाल पर डीजी ने कहा कि यूपी की 72 में से 8-10 जेलों में इस तरह के प्रकरण सामने आए हैं।
इन प्रकरणों में जांच के बाद कार्रवाई की गई है। आगे भी जो बंदी और कर्मचारी शामिल पाया जाएगा, उस पर भी कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ से बंदी ऐसा कर रहे हैं। उनकी जांच की जा रही है।
डीजी ने बताया कि बंदियों के मानसिक सुधार के लिए कवायद हो रही है। कई बंदी जमानत होने के बावजूद बाहर नहीं जा पा रहे हैं। उनके लिए सामाजिक संगठनों की मदद ली जा रही है।
बंदियों की पेशी के लिए गारद उपलब्ध कराने की पुलिस अधिकारियों से कहा है। सौ फीसदी बंदियों की रिमांड वीडियो कांफ्रेंसिंग से कराने की कवायद चल रही है। ट्रायल भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से कराने पर विचार चल रहा है।