अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रामशंकर कठेरिया के काफिले के बीच में चल रही नीले रंग की बस चर्चा में आ गई है। बताया जा रहा है कि इस बस में कोई और नहीं बल्कि आगरा जिला पंचायत सदस्य थे। इसी बस को रोकने को लेकर इनररिंग रोड स्थित टोल प्लाजा पर विवाद हुआ।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कठेरिया की सांसद लिखी गाड़ी सहित दो गाड़ियों के निकलने के बाद नीले रंग की बस टोल से गुजरती दिख रही है। बताया जा रहा है कि टोल टैक्स न देने पर इसी बस को रोका गया था।
जब वह नहीं रुकी तो विवाद हो गया। सूत्रों की मानें तो इस बस में जिला पंचायत के 24 सदस्य थे। इन्हें दिल्ली से इटावा की ओर ले जाया जा रहा था।
भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
जिला पंचायत के 28 सदस्यों ने अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल के खिलाफ जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार को अविश्वास प्रस्ताव दिया था। जिलाधिकारी ने प्रस्ताव को मंजूर करते हुए इस पर चर्चा के लिए 12 जुलाई की तारीख निश्चित कर दी। इससे पूर्व सदस्यों को घेराबंदी शुरू कर दी गई है।
सूत्रों की मानें तो इस बस में 24 सदस्यों को किसी गुप्त स्थान पर ले जाया रहा था ताकि 12 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान ये अनुपस्थित रह कर प्रस्ताव को गिरवा दें या फिर अध्यक्ष के समर्थन में अपना मत दें।
इस क्रम में गुजरे काफिले के वाहन
. पहले नंबर पर सांसद लिखी सफेद रंग की फॉरच्यूनर गाड़ी
. दूसरे नंबर पर एक अन्य फॉरच्यूनर गाड़ी
. तीसरे नंबर पर नीले रंग की बस।
. चौथे नंबर पर एक इनोवा गाड़ी। इसके आगे के शीशे पर कुछ लिखा है।
. इसके बाद अन्य कई वाहन निकले।
नीले रंग की बस के पीछे चल रही गहरे रंग की इनोवा गाड़ी को लेकर चर्चा है कि ये गाड़ी जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश बघेल की है। दरअसल, सीसीटीवी फुटेज में गाड़ी के आगे के शीशे पर कुछ लिखा था लेकिन साफ पढ़ने में नहीं आ रहा। आगे बोनट पर जिला पंचायत अध्यक्ष का झंडा जैसा भी दिख रहा है।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद राकेश बघेल ने जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव का तख्ता पलट किया था। वह सपा से अध्यक्ष चुनी गई थीं। कुशल यादव को हटाने के लिए पूरी रूपरेखा डा. रामशंकर कठेरिया ने ही तैयार की थी। तब वह आगरा के सांसद थे।
लोकसभा चुनाव से पहले राकेश बघेल ने कठेरिया का समर्थन करते हुए वर्तमान सांसद व प्रदेश सरकार में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रहे प्रो. एसपी सिंह बघेल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बताया जा रहा है कि इस बार राकेश बघेल के तख्ता पलट को लेकर दो दिग्गजों के बीच वर्चस्व की जंग के रूप में भी देखा जा रहा है।