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डीएपी न मिले तो एनपीके और एसएसपी भी हैं बेहतर विकल्प

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मैनपुरी। डीएपी की किल्लत से किसान परेशान हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने एनपीके और एसएसपी उर्वरक को डीएपी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी है। ये आसानी से बाजार में उपलब्ध भी हैं।
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आलू और सरसों की बुवाई के लिए किसानों को फॉस्फेटी उर्वरक डीएपी (अमोनियम फॉस्फेट) की आवश्यकता पड़ रही है। वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मिश्रा के अनुसार किसान डीएपी के स्थान पर एनपीके और एसएसपी उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं। डीएपी में 46 प्रतिशत फॉस्फोरस और 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। वहीं एनपीके (नाइट्रोजन फॉस्फोरस एंड पोटेशियम) में दस प्रतिशत नाइट्रोजन और 26 प्रतिशत फॉस्फोरस के साथ 26 प्रतिशत पोटोश भी होता है। एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) में 14.5 प्रतिशत फॉस्फोरस, 11 प्रतिशत सल्फर और 21 प्रतिशत कैल्श्यिम होता है। फसलों को आवश्यक सूक्ष्म तत्व इन उर्वरकों से प्राप्त हो जाते हैं।
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एक हजार मीट्रिक टन डीएपी पहुंची
रविवार को डीएपी की एक और रैक मैनपुरी पहुंची। इसमें आरसीएफ कंपनी की एक हजार मीट्रिक टन डीएपी प्राप्त हुई। इससे पहले सप्ताह के बीच में लगातार दो दिन में 2650 मीट्रिक टन डीएपी प्राप्त हो चुकी है।
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डीएपी के स्थान पर एनपीके और एसएसपी बेहतर विकल्प हैं, जो आसानी से उपलब्ध हैं। डीएपी की भी सप्ताहभर में तीन रैक आ चुकी हैं। ऐसे में कहीं भी डीएपी की कमी नहीं रहेगी।
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-डॉ. सूर्यप्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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