खेल से आया अनुशासन, पढ़ाई में मिला फायदा
सेंट कॉनरेड्स इंटर कॉलेज की त्रिशा सिंह ने 10वीं में 97.4 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वह बास्केटबाल की राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। बीते साल अंडर-17 नेशनल बास्केटबाल टूर्नामेंट में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। उनका कहना है कि खिलाड़ी होने से अनुशासन आता है, यही पढ़ाई में उपयोग किया।
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समय प्रबंधन से खेलकूद और पढ़ाई में बैठाया सामंजस्य
अवंतिका सिंह ने 10वीं में 94 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। वह ताइक्वांडो की खिलाड़ी हैं और कई राज्य-राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खेल चुकी हैं। उन्होंने बताया कि बीते साल राष्ट्रीय स्तर की ताईक्वांडो प्रतियोगिता में दूसरा स्थान पाकर सिल्वर मेडल हासिल किया था। खेल के साथ पढ़ाई को समय प्रबंधन के जरिये आसान बनाती हूं।
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खेलकूद के मुकाबले पढ़ाई को अधिक दिया समय
12वीं में अमित्युष सहाय ने 91.2 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। वह बास्केटबाल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। अंडर-19 नेशनल बास्केटबाल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया। उनका कहना है कि खेलकूद से फिटनेस बेहतर होती है। परीक्षा के दौरान खेलकूद से अधिक समय पढ़ाई को दिया।
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लगन से हॉबी और पढ़ाई को बनाया आसान
हाईस्कूल में 93.8 फीसदी अंक हासिल करने वाली दीवा गुप्ता ताइक्वांडो की खिलाड़ी हैं। बीते साल विदिशा मध्यप्रदेश में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। उनका कहना है कि पढ़ाई के साथ खेल के लिए समय निकालना दोहरी चुनौती रहा लेकिन लगन से ये दोनों आसान हो गए।