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चुनावी इतिहास: आगरा में महज 47 वोटों से हारे थे हुकुम सिंह, रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी ने दर्ज की थी जीत

Sun, 30 Jan 2022 12:05 AM IST
मुकेश कुमार अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला आगरा

सार

आगरा जिले में सबसे कम वोटों से बनवारी लाल जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उनकी तरह ही शहर में 10 ऐसे विधायक रहे हैं जो 500 वोटों के अंतर से चुनाव जीते और विधायक बने।
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आगरा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महज 47 वोट कम मिले और विधायक बनने का सपना टूट गया। आगरा में आजादी के बाद के तीसरे विधानसभा चुनाव (1962) में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के फतेहाबाद से चुनाव लड़े हुकुम सिंह का ख्वाब 47 वोटों ने तोड़ दिया। उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के बनवारी लाल ने हराया था। जिले में सबसे कम वोटों से बनवारी लाल जीतकर विधानसभा पहुंचे। उनकी तरह ही शहर में 10 ऐसे विधायक रहे हैं जो 500 वोटों के अंतर से चुनाव जीते और विधायक बने। 

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चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार आजादी के बाद 70 वर्षों में 17 विधानसभा चुनाव में सबसे कम वोटों से बनवारी लाल जीते तो उनके बाद कांग्रेस के कृष्णवीर सिंह कौशल ने केवल 80 वोटों से चुनाव जीता और भाजपा के रमेशकांत लवानियां की विधायक बनने की हसरत पूरी न हो सकी। सबसे ज्यादा कांटे की टक्कर फतेहाबाद, आगरा छावनी, आगरा पूर्व और आगरा पश्चिम पर रही है। इनमें से सभी मुकाबले आमने-सामने के थे, जिनमें मामूली अंतर से ही जीत-हार हुई। 

दो बार जीतने से चूके भोगीलाल मिश्रा
कांग्रेस नेता भोगीलाल मिश्रा ने 1967 और 1969 का चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों ही चुनाव में वह बेहद मामूली अंतर से हार गए। पहली बार आगरा पश्चिम सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़े भोगीलाल मिश्रा को रिपब्लिकन पार्टी के मास्टर मान सिंह ने केवल 122 वोटों से हराया। 

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उनकी हार के पीछे जनसंघ के प्रत्याशी ए. प्रकाश रहे, जिन्होंने इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया। उन्हें 1447 वोट मिले थे। 122 वोटों की हार को भोगीलाल मिश्रा भुला न सके और दो साल बाद 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में आगरा पश्चिम सीट से कांग्रेस के टिकट पर फिर लड़े। इस बार भारतीय क्रांति दल के हुकुम सिंह ने उन्हें 416 वोटों से हरा दिया।

भीष्म पितामह को झेलनी पड़ी 511 वोटों की हार
1969 में ही आगरा छावनी से जनसंघ नेता और भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले राजकुमार सामा कांटे की लड़ाई में 511 वोटों से हार गए। उन्हें कांग्रेस के देवकीनंदन विभव ने हराया। कांटे की टक्कर में आगरा के 10 प्रत्याशी ऐसे हैं जो 500 वोटों के अंतर से लखनऊ में विधानसभा में बैठने के अपने ख्वाब को पूरा नहीं कर पाए हैं। 

15 प्रत्याशी ऐसे रहे जो लगभग एक हजार वोटों की हार से जीतने से चूक गए। इनमें एत्मादपुर से घनश्याम प्रेमी, फतेहपुरसीकरी से चंपावती, आगरा ग्रामीण से करन सिंह काने, एत्मादपुर से रामखिलाड़ी वर्मा, खेरागढ़ से जगदीश चंद्र दीक्षित प्रमुख रूप से शामिल हैं। 
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साल         विधानसभा क्षेत्र              विजेता             वोट           हारे                        वोट          अंतर
1962         फतेहाबाद            बनवारी लाल       10986     हुकुम सिंह                 10939          47
1985           छावनी        कृष्णवीर सिंह कौशल    27455    रमेशकांत लवानियां     27375          80
1967     आगरा पश्चिम            मान सिंह               15566    बीएल मिश्रा               15444         122
1985       आगरा पूर्व      सत्यप्रकाश विकल           24409    सतीशचंद्र गुप्ता         24264         145
1996        फतेहाबाद    विजय पाल सिंह               36518    छोटेलाल वर्मा            36163         355
1967            बाह                 आर दास                 6629     आर चरन                  6222          407
1969          पश्चिम              हुकुम सिंह               15209      बीएल मिश्रा              14793         416
1969          छावनी         देवकीनंदन विभव           20324    राजकुमार सामा          19813        511
1962       फिरोजाबाद         भगवान दास             12086    जगदीश प्रसाद             11547        539
1977        आगरा पूर्व         सुरेंद्र कालरा              25472    प्रकाश नारायन गुप्ता    24916         556
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