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सात दिन में खुल जाएगा हिमांशी की मौत का राज

Thu, 28 Apr 2016 01:55 AM IST
चंद्रमोहन शर्मा
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‌हिमांशी - फोटो : demo
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बसपा के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र कश्यप की पुत्रवधु हिमांशी कश्यप की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला की बेलेस्टिक यूनिट में परीक्षण शुरू हो गया है। छह अप्रैल को गाजियाबाद स्थित ससुराल में उसकी संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि गुत्थी सुलझने में ज्यादा से ज्यादा सात दिन लगेंगे। हाईप्रोफाइल केस में क्राइम सीन री-क्रिएशन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट एनलाइसिस पहले ही हो चुका है। अब उस लाइसेंसी रिवाल्वर का परीक्षण किया जाना शेष है जिससे चली गोली ने हिमांशी की जान ली थी।
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हिमांशी की शादी नरेंद्र कश्यप के बेटे सागर से हुई थी। वह बदायूं के बसपा नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री हीरालाल कश्यप की बेटी थी। छह अप्रैल को ससुराल में कमरे से अटैच बाथरूम में उसका लहुलुहान शव मिला था। पास में उसके पति सागर कश्यप का लाइसेंसी रिवाल्वर पड़ा था। नरेंद्र कश्यप का कहना था कि हिमांशी ने सुसाइड किया है जबकि हीरालाल कश्यप ने दहेज के लिए हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें नरेंद्र कश्यप, उनकी पत्नी देवेन्द्री, दोनों बेटे सागर और सिद्धार्थ, बेटी सरिता और शोभा नामजद हैं। पुलिस ने हाईवोल्टेज ड्रामा के बाद सात अप्रैल को नरेंद्र कश्यप देवेंद्री और सागर को गिरफ्तार कर लिया था। तीनों जेल में हैं।
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पुलिस पर यह स्पष्ट करने का भारी दबाव है कि हिमांशी को मारा गया या उसने सुसाइड किया। इसके चलते गाजियाबाद के एसएसपी विधि विज्ञान प्रयोगशाला में पैरवी कर रहे हैं। उनकी संस्तुति पर लखनऊ प्रयोगशाला के निदेशक डा. श्याम बिहारी उपाध्याय के नेतृत्व में आगरा के वैज्ञानिकों की टीम गाजियाबाद में क्राइम सीन का री-क्रिएशन करके आ चुकी है। अब सागर के रिवाल्वर का परीक्षण किया जा रहा है।

ऐसे सुलझेगी गुत्थी
- पोस्टमार्टम के दौरान हिमांशी के शव से मिली गोली पर लगे तीन निशान देखे जाएंगे। कारतूस के पीछे की तरफ बना फायरिंग पिन मार्क, गोली छूटते समय बना इजेक्ट मार्क और नाल से गुजरते समय बना चैंबर मार्क।
- इसके बाद इसी बोर की गोली रिवाल्वर से चलाई जाएगी। इस पर भी वही तीन निशान देखे जाएंगे। अगर तीनों समान मिलते हैं तो माना जाएगा कि हिमांशी की जान लेने वाली गोली इसी रिवाल्वर से चली।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अध्ययन से देखा गया है कि हिमांशी के शव पर मिले गोली के निशान कैसे हैं। दूरी केहिसाब से निशान कई तरह के होते हैं। फाउलिंग, स्कोर्चिंग, ब्लेकनिंग, टैटोनिंग।
- अगर गोली सटाकर मारी गई है तो प्रेशर से रिंग बन जाता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में अब्रेजन रिंग कहते हैं। अगर दूरी बहुत कम है तो घाव के पास बारूद के कण मिलते हैं। इसे फाउलिंग कहते हैं।
- थोड़ी सी और दूरी है तो टेटोनिंग। अगर इससे और थोड़ी ज्यादा है तो घाव के पास त्वचा झुलस जाती है, इसे स्कोर्चिंग कहते हैं। अगर काला घेरा बन जाए तो ब्लेकनिंग कहा जाता है।
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- इसके अलावा गोली लगने की दिशा से पता लगाया जाता है कि यह खुद मारी गई है या किसी और ने चलाई है।
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