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ताजनगरी की तरक्की के बड़े-बड़े वादे हुए: न खंडपीठ मिली और न बैराज, आईटी पार्क अभी तक है ख्वाब

Tue, 18 Jan 2022 12:26 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

एक बार फिर चुनाव आ गए हैं, लेकिन ताजनगरी की तरक्की के लिए किए गए बड़े-बड़े वादे अभी तक पूरी नहीं हुए। न यमुना पर बैराज बना है। और न ही हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग पूरी हुई है। 
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ताजमहल: ताज के पार्श्व में बहती यमुना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ताजनगरी की तरक्की के बड़े-बड़े वादे हर चुनाव में किए जाते रहे हैं, लेकिन हर बार शहरवासी छला महसूस करते हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हो या स्टेडियम, हाईकोर्ट खंडपीठ हो या लैदर पार्क, वादों की फसल ही काटी जा रही है। किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं हुआ। खंडपीठ के मामले में तो जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में खंडपीठ के लिए आगरा को उपयुक्त स्थान बताया गया लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। जनप्रतिनिधियों ने ईमानदार कोशिश नहीं की। अंतरराष्ट्रीय पहचान होने के बाद भी आगरा इन सुविधाओं से महरूम है।

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1. यमुना पर बैराज
आगरा में गंभीर जल संकट से निपटने के लिए यमुना नदी पर बैराज बनाने की मांग 40 साल से की जा रही है। यमुना नदी में बैराज बनने से भूगर्भ जलस्तर में वृद्धि होगी और यमुना में सालभर पानी की कमी नहीं होगी। दो साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा दौरे के दौरान ताजमहल के पास नगला पैमा में बैराज बनाने के लिए जमीन चिह्नित करने और बैराज बनाने की घोषणा की थी लेकिन यह योजना भी मूर्त रूप नहीं ले सकी है। इस सरकार में भी बैराज का मुद्दा अपनी जगह कायम है। 
2. अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
ताजनगरी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का मुद्दा वर्ष 1980 से चल रहा है। ताजमहल के कारण यहां देसी-विदेशी सैलानियों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए एयरपोर्ट जरूरी है। खेरिया हवाई अड्डे के वायु सेना परिसर में होने के कारण यहां सुरक्षा संबंधी बंदिश रहती हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी यहां सीधी नहीं आती हैं। मुंबई और दिल्ली से आने वाली फ्लाइट भी नियमित नहीं रहती है। 

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ऐसे में आगरा में पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा। लंबे समय से आगरा के पर्यटन उद्यमी इंटरनेशनल हवाई अड्डे की मांग कर रहे हैं लेकिन भाजपा सरकार ने जेवर में एयरपोर्ट का तोहफा दे दिया। आगरा के लोग एक बार फिर से ठगे रह गए। टूरिस्ट गिल्ड के राजीव सक्सेना का कहना है कि आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होने से पर्यटन में बड़ा बदलाव आएगा। 

3. यमुना रिवर फ्रंट
ताजमहल से लेकर रामबाग के बीच यमुना किनारे के दोनों ओर साबरमती नदी की तर्ज पर यमुना रिवर फ्रंट बनाने की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा में ताजमहल पर सफाई अभियान की शुरुआत के समय जब आगरा आए, तब उन्होंने चमेली फर्श से आगरा किले की ओर देखते हुए अधिकारियों को यमुना रिवर फ्रंट की योजना बनाने के निर्देश दिए थे। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग को यह जिम्मा सौंपा गया। पांच साल में यमुना रिवर फ्रंट की डीपीआर भी तैयार नहीं हो सकी है। इसलिए यह प्रस्ताव अभी तक कागजों तक सीमित है। 

4. आईटी पार्क
ताज ट्रिपेजियम जोन में प्रदूषण रहित उद्योग लगाने की अनुमति है। ऐसे में आगरा में प्रदूषण रहित आईटी पार्क बनाने की मांग पिछले 10 साल से की जा रही है। थीम पार्क के लिए 1400 एकड़ जमीन इनर रिंग रोड के पास अधिग्रहण की गई थी, यह जमीन खाली पड़ी है। आगरा के उद्यमी इसी जमीन पर 500 एकड़ में आईटी पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं। युवाओं को यहीं पर आईटी से संबंधित नौकरियां मिल सकती हैं। इस मांग पर भी अभी तक कोई ठोस कवायद नहीं हुई है।

5. आलू प्रोसेसिंग यूनिट
आगरा व आसपास आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां के किसान बरसों से आगरा में आलू प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की मांग कर रहे हैं। हर साल यहां के आलू किसानों को वाजिब कीमत नहीं मिलने पर आलू फेंकना पड़ता है। आलू प्रोसेसिंग यूनिट लगवाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने कई दफा वादे किए। दस साल पहले इस बारे में जोर-शोर से मांग उठी, लेकिन बात आश्वासन से आगे नहीं बढ़ सकी। आगरा व आसपास के आलू उत्पादकों के लिए आलू प्रोसेसिंग यूनिट नहीं बनाई जा सकी है। 

6. अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम
आगरा में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की मांग पिछले 10 वर्षों से की जा रही है। आगरा के खिलाड़ी लगातार क्रिकेट समेत अन्य खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। महिला क्रिकेट टीम में आगरा की दो खिलाड़ी प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यहां खेल सुविधाओं के नाम पर महज एकलव्य स्टेडियम है। 

आगरा में खेल सुविधाएं बढ़ाए जाने की जरूरत है। दो माह पहले आगरा में हुई सांसद खेल स्पर्धा में हिस्सा लेने आए खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी आगरा में स्टेडियम की स्थापना के लिए प्रयास करने की बात कही थी। सांसद राजकुमार चाहर ने भी यह मुद्दा उठाया था, लेकिन अभी तक स्टेडियम की राह में एक कदम तक नहीं उठाया गया है।
 
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7. हाईकोर्ट बेंच 
हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का मुद्दा 55 साल बाद भी जस का तस है। वर्ष 1956 में हुई समिट में तत्कालीन गर्वनर ने उच्च न्यायालय खंडपीठ का मुद्दा उठाया था। वर्ष 1966 में उच्च न्यायालय स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। इसमें खंडपीठ की मांग उठाई गई। वर्ष 1970 में सरकार ने खंडपीठ पर अपनी मंशा जताई। आगरा, मेरठ, बरेली सहित चार कमिश्नरी में खंडपीठ की मांग होने लगी। 

14 मार्च, 1981 में सरकार ने अपनी संस्तुति कर केंद्र सरकार को पत्र भेजा। इसमें कई जिलों की मांग और स्थान चयनित करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को दी। जस्टिस जसवंत सिंह आयोग का गठन स्थान चयन के लिए किया गया। बार एसोसिएशन और सामाजिक संगठनों ने अपना पक्ष रखा। आयोग ने विस्तृत जांच करके रिपोर्ट वर्ष 1985 में दी। इस रिपोर्ट में खंडपीठ के लिए आगरा को उपयुक्त स्थान बताया गया था।

8. लैदर पार्क
आगरा-जयपुर हाईवे पर फतेहपुरसीकरी रोड पर लैदर पार्क के लिए शिलान्यास वर्ष 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार में किया गया। 13 साल में भी इसका निर्माण नहीं हो सका है। करोड़ों की लागत से जमीन अधिग्रहीत करके काम शुरू हुआ फिर रोक दिया गया। आगरा के चमड़ा उद्योग को विकसित करने के लिए लैदर पार्क एक बड़ी जरूरत है। इस पर भी कोई ठोस कोशिश नहीं हुई। जमीन अधिग्रहण सहित कई मुद्दों पर मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है।
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