जिला अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बाहर जमीन पर पड़ी सूरजमुखी तथा पास में बैठीं पुत्रवधु
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मैनपुरी। जिले में शुरू की गई एंबुलेंस सेवा का लाभ मरीजों को सही ढंग से नहीं मिल पा रहा है। फोन करने के घंटों बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच पा रही है। सोमवार को जिला अस्पताल से सैफई के लिए रेफर की गई वृद्धा दो घंटे तक इमरजेंसी गेट पर तड़पती रही। बाद में अस्पताल में पहुंची एबुंलेंस से उसे सैफई ले जाया गया।
दन्नाहार थाना क्षेत्र के गांव रठेरा निवासी मदनलाल की पत्नी सूरजमुखी(65) की सोमवार को आंत में संक्रमण के कारण हालत बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां डॉ. गौरव पारिक ने उनकी स्थिति को देखते हुए मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर किया।
इसके बाद उनके पौत्र गौरव ने मोबाइल संख्या 8433024517 से 108 एबुंलेंस के चालक को दोपहर 12:34 बजे फोन किया। चालक से बात होने के बाद भी वह 2:30 बजे तक एंबुलेंस लेकर नहीं पहुंचा। इस बीच कई बार एंबुलेंस सेवा के अन्य नंबरों से भी बात की गई। इस दौरान मरीज इमरजेंसी गेट के बाहर जमीन पर तड़पती रही।
बाद में 2:32 बजे एंबुलेंस संख्या यूपी 32 बीजी 8145 जिला अस्पताल पहुंची, लेकिन इस एंबुलेंस में केवल चालक था। जब चालक से पूछा गया कि ईएमटी कहां है तो पहले तो कोई जवाब नहीं दिया, बाद में बताया कि वो गेट बाहर मिलेगा। 2:35 बजे जिला अस्पताल से पीड़िता को एंबुलेंस सैफई के लिए ले गई।
बचाव करते दिखे डीसी
जिला अस्पताल में जब एंबुलेंस चालक से पूछा गया कि आपका ईएमटी कहां है तो उसने कहा कि वो गेट के बाहर मिलेगा। जबकि जिला प्रोग्राम अधिकारी धीरज सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि ईएमटी उस समय महिला अस्पताल में मरीज को शिफ्ट कर रहा था। वहीं डीसी का कहना था कि उनके यहां एंबुलेंस के लिए 2:25 बजे गाड़ी की पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
एंबुलेंस सेवा की सीधे लखनऊ से देखभाल होती है। फिर भी जिले स्तर से कोई लापरवाही हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। मरीजों के साथ लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
-डॉ. एके पांडेय सीएमओ