हृदय रोग विशेषज्ञों ने युवाओं में हार्टअटैक के जोखिम से जुड़े कारकों में मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान और अस्वास्थ्यकर खानपान को प्रमुख बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब 17-18 साल की उम्र में भी कुछ मरीजों को एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ रही है।
खेती में बढ़ते कीटनाशक, मिलावटी सामग्री लोगों को बीमार बना रहा है। इससे मधुमेह, बीपी, कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत भी बन रही है। हार्टअटैक भी हो रहे हैं। ऐसे में लोगों को बीमारी को समय से चिह्नित करने के लिए ईको जरूरी है। हरीपर्वत स्थित होटल में आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी की कार्यशाला के अंतिम दिन ईको कार्डियोग्राफी के बारे में प्रशिक्षण दिया।
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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सीआर रावत ने बताया कि फल, सब्जी, अनाज उगाने के लिए कीटनाशक का उपयोग ज्यादा बढ़ रहा है। खाने-पीने का सामान भी मिलावटी है। इसका असर शरीर पर धीरे-धीरे हो रहा है। फास्टफूड, धूम्रपान और तले भोजन भी करते हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन और मोटापा हो रहा है। इसका सीधा असर हृदय पर पड़ रहा है, इसके चलते युवाओं के हार्टअटैक हो रहे हैं। हालत यह कि 17-18 की उम्र में भी एंजियोप्लास्टी करनी पड़ रही है।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद पालीवाल ने बताया कि जन्मजात बच्चों के हृदय में छिद्र की दर बढ़ रही है। इसमें तीन से पांच फीसदी में ये परेशानी मिल रही है। कुछ में छिद्र स्वयं भर जाते हैं। रक्तप्रवाह उल्टा होने पर बच्चों का शरीर नीला पड़ जाता है, इसमें ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। कई मामलों में शरीर नीला नहीं पड़ता है। ऐसे में शिशुओं की ईकोकार्डियोग्राफी जरूरी है।
आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने बताया कि मेडिकल छात्रों को हैंड्सऑन वर्कशॉप में वाल्व और हृदय की मांसपेशियों की ताक की जांच, क्लॉट, हार्ट ट्यूमर, ईकोकार्डियोग्राफी समेत अन्य का प्रशिक्षण दिया गया है। डॉ. राजकुमार गुप्ता, डॉ. जय बाबू और डॉ. अनुराग जैन ने बताया कि हार्टअटैक के मरीज का आईसीयू में इलाज के लिए ईको समेत अन्य उपकरण की जानकारी स्टाफ को भी जरूरी है। कार्यशाला में डॉ. टीपी सिंह, डॉ. चंदन कुमार, डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल आदि मौजूद रहे।