कोर्ट में आरोपियों की पेशी के दौरान की तस्वीर
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पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) सदस्य अतीकुर्रहमान की जमानत अर्जी पर 6 नवंबर को सुनवाई होगी। शुक्रवार को अतीकुर्रहमान के अधिवक्ता ने जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी लगाई थी।
हाथरस में दंगे फैलाने की साजिश के आरोप में जेल में बंद अतीकुर्रहमान की जमानत अर्जी जिला जज की अदालत में लगाई गई है। शुक्रवार को लगाई अर्जी पर जिला जज ने सुनवाई के लिए 6 नवंबर की तारीख तय कर दी। यह अर्जी अतीकुर्रहमान के अधिवक्ता मधुबन दत्त चतुर्वेदी द्वारा लगाई गई है।
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सरकारी वकील शिवराम तरकर ने बताया कि जमानत पर 6 नवंबर को सुनवाई होगी, जबकि उसके दो साथी आलम और मसूद की जमानत पर सुनवाई 4 नवंबर को एडीजे (अपर जिला जज) दशम कोर्ट में होगी। अतीकुर्रहमान के अधिवक्ता ने बताया कि अब वह 6 नवंबर को अपना पक्ष अदालत में रखेंगे।
गौरतलब है कि विगत पांच अक्तूबर को स्विफ्ट कार में हाथरस जा रहे चार युवकों को यमुना एक्सप्रेसवे के मांट टोल प्लाजा से पकड़ा गया था। इनमें अतीकुर्रहमान निवासी मुजफ्फरनगर, आलम निवासी रामपुर, सिद्दीक निवासी केरल, मसूद निवासी बहराइच शामिल है। पुलिस का दावा है कि इन चारों के संबंध सदस्य पीएफआई/सीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया/कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया) हैं। ये चारों हाथरस कांड के बाद विदेशी फंडिंग से हिंसा भड़काने की साजिश रच रहे थे।
मामले की जांच में जुटी मथुरा क्राइम ब्रांच को पता लगा है कि अतीकुर्रहमान वर्ष 2019 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी है। उसने वहां भी दंगाइयों के साथ मिलकर माहौल खराब किया था। अतीकुर्रहमान ने पर्दे के पीछे रहकर पीएफआई के माध्यम से दंगा फैलाने का षड्यंत्र रचा था। शुरुआत में मुजफ्फरनगर पुलिस को इसकी जानकारी नहीं हुई। मुजफ्फरनगर कोतवाली पुलिस के पास से यह मुकदमा जांच के लिए क्राइम ब्रांच को चला गया। मुजफ्फरनगर क्राइम ब्रांच की जांच में अतीकुर्रहमान का नाम प्रकाश में आया, लेकिन तब तक वह फरार हो चुका था। क्राइम ब्रांच उसे तलाश रही थी।