डा. प्रतिमा श्रीवास्तव सीएमओ कासगंज।
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कासगंज। ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे इस साल बहुत ही अहम दिवस है। क्योंकि कोरोना संक्रमण के कारण हाथों को बार-बार धोने पर विशेष फोकस है। इसलिए जागरूकता की महती जरूरत है। चिकित्सकों का मानना है कि हाथों में अनदेखी गंदगी, वायरस छिपे रहते हैं जो खाने-पीने से शरीर में पहुंच जाती हैं और बीमारियां जन्म लेती हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी कि हाथों को स्वच्छ बनाएं और बीमारी को दूर भगाएं। जब हाथ धोएंगे तभी कोरोना को हरा पाएंगे। सरकारी महकमों के अलावा सामाजिक संस्थाएं भी ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर लोगों को जागरूक करेंगे।
तैयार की गई विशेष थीम
इस साल ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर विशेष थीम तैयार की गई है। डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि इस बार की थीम सभी के लिए स्वच्छ हाथ निर्धारित किया है। इसी थीम पर स्वास्थ्य विभाग ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर काम की तैयारी कर चुका है। डब्ल्यूएचओ की पहल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने हैंड हाइजिन फॉर ऑल ग्लोबल इनिशिएटिव का स्लोगन देते हुए हाथ धुलवाने का संकल्प दिलाने की तैयारी की है।
हाथ धोना कब-कब जरूरी
- शौच के बाद
- खाना बनाने, खाने से पहले व बाद में
- मुंह, नाक व आंखों को छूने के बाद
- खांसने व छींकने के बाद
- घर की सफाई करने के बाद
- किसी बीमार व्यक्ति से मिलकर आने के बाद व पालतू जानवरों से खेलने के बाद
हाथ धोने का सही तरीका यह है कि दो मिनट तक साबुन से 6 चरणों में हाथ धोएं। सबसे पहले सीधे हाथ में साबुन लगाकर रगड़ना। उसके बाद उलटे हाथ में साबुन लगाना, फिर नाखुन, अंगूठा, मुट्ठी उसके बाद कलाई धोनी चाहिए। इस तरह हम हाथ धोएंगे तो निश्चित ही 90 प्रतिशत बीमारियों से बच सकेंगे। - डॉ. प्रतिमा श्रीवास्तव, सीएमओ।
द स्टेट ऑफ हैंडवॉश की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्र में 54 प्रतिशत आबादी शौचालय के बाद हाथ धोती है। सिर्फ 13 प्रतिशत आबादी खाना बनाने से पहले और 27 प्रतिशत बच्चों को खाना खिलाने से पहले हाथ धोती है। शहरी क्षेत्र में 94 प्रतिशत लोग शौचालय के बाद हाथ धोते हैं। हमें हाथ धोने का संकल्प लेना चाहिए। - डॉ. अविनाश, डिप्टी सीएमओ।