ताजनगरी की कालीन, जरदोजी और मार्बल इनले हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री चीन को सीधे टक्कर दे रही है। पिछले दस सालों में यह इंडस्ट्री 30 फीसदी बढ़ी है। अब 1800 करोड़ रुपये का टर्नओवर है। इससे 1.5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। चीन से धागा आयात किया जाता था, अब इसके स्वदेशी विकल्प तलाश लिए हैं। कारोबारियों की मुख्य मांग एक क्लस्टर क्षेत्र बनाने की है जहां कालोनी, जरदोजी, माबैल इनले आदि के कारोबार को एक ही जगह रखा जाए।
ये हैं मांगें: उद्योग को बढ़ावा देने को योजना लायी जाए। क्लस्टर होना जरूरी।
जरदोजी
-350 कारोबारी
-400 करोड़ रुपये का निर्यात
-300 करोड़ का घरेलू कारोबार
-20 हजार लोगों को रोजगार
उपलब्धि: चीन से आयातित धागे का विकल्प देश में हो रहा उपलब्ध।
ये हैं मांगें: स्मारक खोले जाएं। असंगठित उद्योग को संगठित करने पर हो जोर। सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए लगे शिविर, बढ़ाए जाएं पंजीकरण।
मार्बल इनले हैंडीक्राफ्ट
-350 एंपोरियम
-30 हजार प्रत्यक्ष और 70 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार
-700 करोड़ रुपये का निर्यात, 800 करोड़ का घरेलू कारोबार
उपलब्धि: चीन से रॉ मैटेरियल न के बराबर।
ये हैं मांगें: सरकार की योजना सहयोगात्मक हो। हैंडीक्राफ्ट पर जीएसटी दो साल के लिए मुक्त हो। वीजा ऑन अराइवल हो, किसी तरह का शुल्क न लगे।
चीन की धूमिल छवि का मिलेगा फायदा
कोरोना फैलने के मामले में चीन की छवि दुनियाभर में धूमिल हुई है। वहां पर्यटक जाने से बचेगा। इसका लाभ हमें मिल सकता है। कोरोना की वैक्सीन बनने के बाद पर्यटकों का आवागमन बढे़गा। इससे स्थानीय हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री लाभान्वित होगी। -प्रह्लाद अग्रवाल, अध्यक्ष आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर
प्रचार-प्रसार की आवश्यकता
जरदोजी उद्योग बड़ी संख्या में रोजगार मुहैया कराता है। फिर भी असंगठित क्षेत्र में आता है। सरकारी योजनाओं की जानकारी बुनकरों को हो नहीं पाती। इसके लिए प्रचार प्रसार की आवश्यकता है। -फैजानुद्दीन, जरदोजी उद्यमी
बढ़ावा देने की जरूरत
कालीन उद्योग ने चीन के फाइन सिल्क की मोनोपोली को वेस्ट मैटेरियल से तैयार वैरायटी से खत्म करने का काम किया है। इस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की जरूरत है। -आरडी शर्मा, अध्यक्ष आगरा फ्लोर कवरिंग एसोसिएशन
क्लस्टर की मांग पुरानी
कालीन और दरी उद्योग के लिए क्लस्टर बनाए जाने की मांग बरसों पुरानी है। इस समय विभिन्न क्षेत्रों में काम बंटा हुआ है। इसे एक जगह समेटने की जरूरत है। -संदीप गुप्ता, दरी निर्यातक
बनारस फेयर पर आस
अक्तूबर के दौरान बनारस में फेयर आयोजित होने जा रहा है। इसके टलने से काफी नुकसान होगा। मार्च का पहले ही निरस्त हो चुका है। इधर, जीएसटी रिफंड और ड्रा बैक सुचारु रूप से मिले। -राजेश जैन, कोषाध्यक्ष आगरा फ्लोर कवरिंग एसोसिएशन