देवगुरु बृहस्पति आज (सोमवार) से मकर राशि में सीधी चाल (मार्गी) से चलेंगे। बृहस्पति को सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार गुरु पति सुख, विवाह धर्म व अध्यात्म, संतान, विद्या, विवेक बुद्धि, स्वर्ण आदि का कारक ग्रह माना जाता है। गुरु शुभता के प्रतीक है। गुरु कर्क राशि में उच्च के व मकर में नीच राशि के होते हैं। धनु व मीन राशि गुरु की स्वयं की है।
इससे पूर्व 11 अक्तूबर को न्याय के देवता शनि भी मकर में मार्गी हुए थे। आज गुरु शनि के साथ युति सम्बन्ध बनाएंगे। गुरु के अपनी नीच राशि मकर में मार्गी होने से नीचभंग योग भी बनेगा। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति 20 नवंबर 2021 तक मकर राशि में रहेंगे। 21 नवंबर से 13 अप्रैल 2022 से कुंभ राशि मे प्रवेश करेंगे।
ज्योतिर्विज्ञान के अनुसार जब-जब देवगुरु बृहस्पति वक्री, अस्त व अतिचारी अवस्था में होते हैं, देश-दुनिया के साथ जातकों पर शुभाशुभ प्रभाव डालते हैं। 20 जून 2021 से गुरु वक्री अवस्था में रहे। अब आगे नौ जनवरी 2022 से गुरु दोबारा अतिचारी होंगे। गुरु के अति चारी होने से अराजकता व मंहगाई का प्रकोप बढ़ेगा। सरकार को हिंसा, उपद्रव व आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।