आगरा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए नई पहल की जा रही है। विद्यार्थियों को अनुभव आधारित शिक्षा देने के साथ समाज और कॅरिअर से जोड़ने के लिए कई नई गतिविधियां शुरू करने की तैयारी है।
सरकारी स्कूलों में बच्चों को अब सिर्फ किताबों और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें बाहर भी सीखने का मौका दिया जाएगा। बच्चों में पढ़ने की आदत, सामाजिक जिम्मेदारी, संस्कार और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने की गतिविधियां होंगी।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी डाॅ. राकेश सिंह ने बताया कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए रीडिंग मेले आयोजित कर उनमें किताबें पढ़ने की रुचि पैदा की जाएगी। कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को म्यूजियम विजिट, मैप मेकिंग और भूगोल से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा। वहीं कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों को ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराकर इतिहास को वास्तविक अनुभव से समझाया जाएगा।
स्कूलों में नशामुक्ति काउंसलिंग
बच्चों को नशे के बढ़ते खतरे से बचाने के लिए स्कूल स्तर पर नियमित नशामुक्ति काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। शिक्षकों और काउंसलरों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
विद्यांजलि से हो सकेगा जुड़ाव
स्कूलों को समाज से जोड़ने के लिए विद्यांजलि जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, वॉलंटियर्स और सेवानिवृत्त शिक्षक सरकारी स्कूलों से जुड़कर बच्चों को अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को किताबों के साथ वास्तविक जीवन और कॅरिअर से जुड़ी जानकारी भी मिलेगी।
नामांकन बढ़ाना बड़ी चुनौती
सरकारी स्कूलों के सामने विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाना बड़ी चुनौती है। जिले के परिषदीय स्कूलों में नए प्रवेश नहीं होने की स्थिति सामने आ चुकी है। ऐसे में यदि स्कूलों में पढ़ाई के साथ रीडिंग, भ्रमण, खेल, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभव आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए तो सरकारी विद्यालयों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का आकर्षण बढ़ सकता है।