वनखंडेश्वर महादेव मंदिर पर भागवत कथा का दूसरे दिन प्रवचन देते हुए आचार्य सतीश अवस्थी महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है।
आगरा के जैतपुर के रैपुरा दीक्षित गांव के वनखंडेश्वर महादेव मंदिर पर भागवत कथा का दूसरे दिन प्रवचन देते हुए आचार्य सतीश अवस्थी महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ, तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। उन्होंने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया।
विज्ञापन
कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। आयोजक एवं परीक्षत सविता मिश्रा, विनोद मिश्रा ने लोगों से भागवत कथा श्रवण का पुण्यलाभ अर्जित करने का आह्वान किया।