जिन कोठों में युवतियां रह रही थी, उनमें छोटे से कमरे बने हैं। इन कमरों में तीन से चार युवतियों को रखा जाता था। यहीं पर देह व्यापार भी कराया जा रहा था। बाहर संचालिका बैठकर निगरानी करती हैं। वहीं दलाल भी सक्रिय रहते हैं।
गुड़िया संस्था के समन्वयक उमाशंकर ने बताया कि हमारी संस्था ने कई जिलों में रेस्क्यू आपरेशन करके तीन हजार से अधिक युवतियों को देह व्यापार से मुक्ति दिलाई है। पश्चिम बंगाल और नेपाल की युवतियों को नौकरी और शादी का झांसा देकर लाया जा रहा है।
एक बार देह व्यापार में फंसने के बाद युवतियां बाहर नहीं निकल पाती हैं। एक से दो लाख में बेच दी जाती हैं। पुलिस को देह व्यापार की जानकारी होती है। मगर, कार्रवाई नहीं की जाती है।
कोठों से मुक्त कराई गईं 11 युवतियों को घर भेजने की कवायद की जाएगी। गुड़िया संस्था के पदाधिकारी युवतियों की काउंसिलिंग करेंगे। उनके असली नाम और पते की जानकारी लेंगे। इसके बाद युवतियों को घर भेजा जाएगा।