छात्रा को लगता है कि पिता को समय से सही उपचार मिला होता तो वह शायद बच जाते। छात्रा के पिता कोरोना संक्रमित थे, आगरा में ऑक्सीजन की उपलब्धता न होने से उन्हें अलीगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। छात्रा इस सदमे से अभी तक बाहर नहीं आ पा रही है।
घर में अकेला बचा, अब आर्थिक संकट भी
सेंट जोंस कॉलेज स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र ने काउंसलर को फोन करके बताया कि उसके पिता की तीन वर्ष पहले मौत हो चुकी है। कोरोना की दूसरी लहर में पहले मां और फिर भाई की मौत हो गई। अब वह परिवार में अकेला बचा है। बेहद तनाव में है।
उसे आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सामने मुख्य परीक्षा भी है। पढ़ने बैठता है तो मन नहीं लगता। मन में निराशा का भाव आता है। उसे ठीक से नींद नहीं आ रही है। ऐसे में खुद को संभालना उसके लिए मुश्किल भरा हो रहा है।
पसंदीदा कामों में मन लगाने के लिए प्रेरित किया
सेंट जोंस कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना पाटंकर ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में मौत के आंकड़ों को देखते हुए कॉलेज की ओर से हेल्प लाइन नंबर छात्र-छात्राओं के लिए जारी किया गया। आठ छात्र-छात्राएं ऐसे सामने आए, जिन्होंने कोरोना की दूसरी लहर में अपने माता-पिता या फिर घर के किसी और सदस्य को खोया है। अब वह तनाव में हैं।
इनको समझाया गया कि यह आपदा का समय है, किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है। उनका परेशान होना या तनावग्रस्त होना स्वाभाविक भी है। इससे बाहर निकलने के लिए रुचिकर कामों में मन लगाने के लिए प्रेरित किया।
विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका मसीह ने छात्रों से कहा गया कि वह सुबह के समय बाहर निकल टहलें जरूर। योग, ध्यान और व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। उन्हें कोई परेशानी हो तो संपर्क जरूर करें। दोस्तों, परिवार के सदस्यों और अपनी नजदीकी लोगों के साथ अपनी भावनाएं जरूर साझा करें।