तारीख के फेर ने गौरव का सपना तोड़ दिया। 1500 मीटर दौड़ और लंबी कूद का खिलाड़ी गौरव निराश है, लेकिन अभी उम्मीद नहीं टूटी है। उसका जन्म 31 दिसंबर 2004 को हुआ, लेकिन नियम के अनुसार वो प्रतियोगिता में तभी हिस्सा ले सकता है, जब उसका जन्म एक जनवरी 2005 के बाद हुआ हो।
आधे घंटे की तो बात थी...पहले पता होता तो एक जनवरी लिखवा देते। कम से कम मेरा राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में भाग लेने का सपना तो नहीं टूटता। यह दर्द है बाह के गौरव कुमार का। 31 दिसंबर 2004 को पैदा हुए गौरव इस साल एक नवंबर से लखनऊ में होने वाली राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि एक जनवरी 2005 के बाद पैदा होने वालों को ही इसमें मौका मिल रहा है। जिला स्तर पर हुई प्रतियोगिता की गलती का खामियाजा गौरव अब भुगत रहे हैं।
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यह है पूरा मामला
बाह के होलीपुरा के दामोदर इंटर काॅलेज में 12वीं का छात्र गौरव बचपन से ही खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहता था। इसके लिए जमकर मेहनत करता है। गौरव का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है। पिता हलवाई हैं और घर में मां के अलावा चार भाई-बहन हैं। विभिन्न प्रतियोगिताओं में गौरव दर्जनभर से ज्यादा पदक जीत चुका है। इसी महीने 12 तारीख को आगरा में हुई जिला स्तरीय और 16 अक्तूबर को मैनपुरी में हुई मंडलीय प्रतियोगिता में भी गौरव ने प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त किया। एक नवंबर से लखनऊ में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होनी है। 31 अक्तूबर को टीम रवाना हो जाएगी। 29 अक्तूबर को स्कूल की प्रिंसिपल ने गौरव को बताया कि उसका चयन मंडलीय प्रतियोगिताओं के लिए नहीं हुआ है। पता चलते ही गौरव परेशान हो गया और उसने अपने चाचा के साथ सोमवार को डीआईओएस कार्यालय में आकर अधिकारियों से मुलाकात की।
जेडी से की मुलाकात
गौरव ने सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस के साथ ज्वाइंट डायरेक्टर शिक्षा विभाग आरपी शर्मा से मुलाकात की। अपनी समस्या बताई। इस पर जेडी ने तुरंत ही मंडलीय क्रीड़ा अधिकारी से बात की। उन्हें जानकारी दी गई कि इस सत्र में राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए जो जीओ आया है, उसमें अंडर-19 के लिए एक जनवरी 2005 की तिथि निर्धारित की गई है। इसलिए गौरव का नाम नहीं आया है। जेडी ने पूछा कि फिर इसने जिला और मंडल स्तरीय प्रतियोगिताएं कैसे खेलीं? इस पर उन्हें जानकारी दी गई कि यह गड़बड़ी जिला स्तर पर हो गई थी। जिला स्तर पर पदक जीतने के बाद गौरव का चयन मंडल के लिए हुआ।
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मायूसी हुई पर उम्मीद है कायम
जीओ की जानकारी मिलने पर गौरव को बहुत मायूसी हुई। गौरव ने बताया कि मंडल स्तर पर पदक जीतने के बाद उसने मेहनत दोगुनी कर दी थी। अपने गांव में बिना संसाधनों के वो दिन में चार बार दौड़ का अभ्यास कर रहा था। गौरव ने बताया कि मंडल स्तर पर उसे बिना तैयारी के पोल वॉल्ट में भी भाग दिलवा दिया था। वैसे वो 1500 मीटर दौड़ और लंबी कूद का खिलाड़ी है।