फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो सौ साल में पहली बार नहीं लगेगा गणगौर मेला, राजस्थानी परम्परा में होती है शिव-पार्वती की पूजा

Fri, 27 Mar 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
गणगौर मेला सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नवरात्र के तृतीया को लगने वाला प्राचीन गणगौर मेला इस बार कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण स्थगित कर दिया गया है। शहर में यह मेला तकरीबन 200 साल से लग रहा है। इसकी शुरुआत गोकुलपुरा से हुई थी।
विज्ञापन


यहां 22 से अधिक गणगौर के जोड़े सजाए जाते हैं। इसके बाद मोती कटरा और कमलानगर में भी यह मेला आयोजित किया जाने लगा, लेकिन अबकी बार कहीं भी मेला नहीं लगाया जा रहा है।

गोकुलपुरा में गणगौर मेले की परंपरा राजस्थान के लोगों के यहां आने के बाद से शुरू हुई। यहां हर समाज की ओर से गणगौर के जोड़े सजाए जाते हैं। शिव पार्वती के स्वरूप में गणगौर की पूजा की जाती है। महिलाएं व्रत रखकर इनका पूजन करती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

जोड़ों को आकर्षक परिधानों से सजाकर कीमती जेवरात पहनाए जाते हैं। दो दिवसीय मेले में इनकी शोभायात्राएं बैंडबाजों के साथ निकाली जाती हैं। ताल मंगलेश्वर तक भ्रमण कराने के बाद वापस अपने स्थानों पर रखा जाता है। 

मेला कमेटी के अध्यक्ष रमेश वर्मा, महामंत्री महेशचंद्र शर्मा ने बताया कि मेला इस बार कोरोना के कारण स्थगित किया गया है। यह संभवत: पहला मौका है जबकि मेले को स्थगित किया गया है। मेला कमेटी के सदस्य राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि पारंपरिक मेला शुक्रवार और शनिवार को लगाया जाना था मगर अबकी बार मेला नहीं लगाया जा रहा है। 

मोती कटरा मेला कमेटी के ब्रजेश दधीच ने बताया कि मोती कटरा में मेला लंबे समय से लगाया जा रहा है, लेकिन इस बार नहीं होगा। कमला नगर में भी प्रवीणा पालीवाल आदि मेले का आयोजन करतीं हैं, लेकिन इस दफा मेला होना संभव नहीं है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें