आगरा सदर तहसील में स्टांप वेंडर का 10 लाख रुपयों से भरा बैग चाचा-भतीजों के गैंग झपट ले गया था। पुलिस ने दो भतीजों को गिरफ्तार कर बृहस्पतिवार को घटना का खुलासा किया। इनसे 84,500 रुपये बरामद किए गए हैं। आरोपी तहसील में रुपये लेकर आने वालों की रेकी करते हैं और मौका पाते ही वारदात को अंजाम देते हैं। पुलिस अब फरार चाचा और उसके एक साथी को ढूंढ रही है।
पुलिस की पूछताछ में विशाल ने बताया कि घटना वाले दिन वो अपने भाई शिवम, चाचा धर्मेंद्र और उनके साथी के साथ आया था। वह और उसके चाचा के साथी ने बैग चुराया। चाचा और भाई बाहर निगरानी कर रहे थे। बैग लेने के बाद दोनों तहसील चौराहे से ऑटो में बैठ गए थे। ईदगाह कटघर तक गए थे। वहां चाचा ने बैग ले लिया। उसमें 6 लाख रुपये मिलने के बारे में बताया। चाचा ने डेढ़-डेढ़ लाख रुपये दोनों भाइयों को दिए थे। बाकी रकम अपने पास रख ली। दोनों भाइयों ने शौक पूरे करने में रुपये खर्च कर दिए। कुछ रकम जुए में हार गए। वह राजस्थान जाने वाले थे। इसके लिए गांव सुचेता आए थे। अपने चाचा का इंतजार कर रहे थे, तभी पकड़ लिए गए।
स्टांप वेंडर के बैग में 10 लाख रुपये थे। पुलिस ने जब चोरों को पकड़ा तो 84500 रुपये बरामद हुए। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि बैग में 6 लाख रुपये मिले थे, जिसे आपस में बांट लिया था। ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी के 4 लाख रुपये कहां चले गए। पुलिस ने वेंडर से रकम से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे हैं। उधर, अभी आरोपियों का चाचा गिरफ्तार नहीं किया गया है। ऐसा भी हो सकता है कि चाचा ने भतीजों से झूठ बोला हो। इसके बारे में पड़ताल की जा रही है।
वारदात के विरोध में बृहस्पतिवार को तहसील के अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक और वेंडरों ने पैदल मार्च निकाला था। पुलिस लाइन में पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि वहां पर एक इंस्पेक्टर मिले। उन्होंने अभद्रता कर दी। इस पर सभी बिना ज्ञापन के लौट गए।