डॉक्टर उमाकांत गुप्ता को अपहरण के बाद धौलपुर के बीहड़ में ले जाकर रखा गया। इससे एक बार फिर पुलिस की चिंता बढ़ने लगी है। बीहड़ में अपहरण करने वाले गैंग के पैर पसारने की आशंका है। 30 साल से बीहड़ अपहरण करने वाले गैंगों की प्रमुख शरण स्थली रही है।
चंबल के किनारे तीन प्रदेश की सीमा में अपहृत को रखा जाता है। इनमें आगरा, धौलपुर और मुरैना है। बीहड़ में ले जाने के बाद गैंग के लोग बाहर नहीं आते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बदमाश पकड़ को दिन में खादर में ले जाते हैं। रात में खेतों में रखते हैं। दिन होने के बावजूद पुलिस खादर में नहीं जाती है। पुलिस के मूवमेंट की जानकारी बदमाशों को पहले से लग जाती है। गांव में सक्रिय सदस्य सरगना को पुलिस के मूवमेंट की जानकारी देते रहते हैं।
पुलिस के मुताबिक बीहड़ में केशव गुर्जर, रामनरेश, बदन सिंह, सुरेंद्र गुर्जर सहित छह गैंग सक्रिय हैं, जो व्यापारी, डाक्टर, अधिवक्ता के अपहरण कर चुके हैं। जेल जाने के बाद बाहर आते ही फिर से वारदात करते हैं। केशव गुर्जर कहां रह रहा है, यह पुलिस को भी पता नहीं है। अब डॉक्टर के अपहरण की वारदात के बाद पुलिस ने फिर से गैंग को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। इसके लिए राजस्थान पुलिस की भी मदद ली जा रही है।
रुपयों को लालच देकर युवाओं को गैंग में करते हैं शामिल
गैंग के सरगना गांव के युवाओं को अपने साथ मिला लेते हैं। इसके लिए उन्हें रुपयों का लालच देते हैं, जो गैंग के खिलाफ सिर उठाता है, उसे धमका दिया जाता है। इस कारण पुलिस के आने पर भी कोई मुंह नहीं खोलता है।
तरीके बदलकर करते हैं अपहरण
अपहरण करने के लिए नए तरीके भी गैंग के सरगना अपना रहे हैं। पहले रेकी की जाती है। युवतियों के माध्यम से संपर्क किया जाता है।
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