राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पांच बार वर्ष 1918, 1919, 1920, 1929 और 1944 में आगरा आए थे। हर बार उनकी एक आवाज पर आगरा उनके साथ आजादी के लिए खड़ा रहा। उनकी एक झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था। स्वतंत्रता सेनानी महादेव नारायण ने कैंट रेलवे स्टेशन पर बापू का साक्षात्कार लिया था। साबरमती का यह संत वर्ष 1929 में 10 दिन यमुना किनारा स्थित गांधी आश्रम में रुका था।
आगरा गेजेटियर 1965 के अनुसार, सोमवार को गांधी जी की 154वीं जयंती है। आगरा से उन्हें खास लगाव रहा। वर्ष 1918 से 1944 तक 5 बार गांधी जी आगरा आए। 1929 में सबसे अधिक 11 दिन वह आगरा में रहे। 10 दिन उन्होंने यमुना किनारा स्थित गांधी आश्रम में रह कर स्वास्थ्य लाभ लिया। जमुना लाल बजाज के साथ यहां से वृथला गए। जहां कुष्ठ रोग निवारण के लिए कुंड में स्नान की मान्यता थी। यहां गांधी जी ने उपचार लिया।
गांधी जी के हर आंदोलन में आगरा अगुवा रहा। 1921 में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू किया तो आगरा में विदेशी वस्त्र व शराब की दुकानों के विरोध में आग भड़की। 122 स्वतंत्रता सेनानी जेल गए। फिर 1928 में साइमन कमीशन आगरा आया तो गांधी जी से प्रेरित होकर आगरावासियों ने काले झंडे दिखाए। साइमन गो बैक... नारे लगाए।
1930 में महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया तो आगरा में स्वतंत्रता के लिए ज्वाला धधक उठी। अंग्रेजों के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए। 661 लोग तब जेल गए थे। 1932 में गांधी जी ने जब गिरफ्तारी दी, तो शहर के स्वतंत्रता सेनानियों में उबाल आ गया। तब जिला व शहर कांग्रेस कमेटी पर ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। तब बैठक करने पर रोक लग गई थी।
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रामलीला मैदान में अंग्रेजों ने चलाई थी गोलियां
गांधी के आंदोलन में सबसे बड़ी आहुति 1942 में आगरा वालों ने दी। 1941 में गांधी जी ने सत्याग्रह शुरू किया। 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जुर्माना और सजा दोनों भुगतीं। अगस्त, 1942 में सत्याग्रह आंदोलन देशभर में फैल चुका था। आगरा में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। लाठीचार्ज, पथराव तक हुआ। तीन से चार दिन तक अंग्रेज व स्वतंत्रता सेनानियों के बीच झड़प होती रही। 10 अगस्त, 1942 को आगरा किला के सामने रामलीला मैदान में विशाल जनसभा में अंग्रेज सरकार ने गोलियां चलवाई। जिसके बाद शहर से गांव तक आजादी के लिए आग धधक उठी थी।
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जब कैंट पर भगदड़ में गई थी युवक की जान
कैंट रेलवे स्टेशन के प्रतीक्षालय में 1944 में महात्मा गांधी का साक्षात्कार करने वाले स्वतंत्रता सेनानी महादेव नारायण टंडन के पुत्र वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके टंडन ने बताया कि पिता जी 1939 से 1942 तक 3 साल जेल में रहे थे। उनको झांसी रेलवे यूनियन से पता चला कि गांधी आगरा होते हुए विशेष ट्रेन से दिल्ली जा रहे हैं। कैंट पर ट्रेन का ठहराव था। वह जब बापू का साक्षात्कार करने जा रहे थे तो एक युवक ने उनसे पूछा कहां, जा रहे हैं...। पिता जी ने कहा, गांधी जी का साक्षात्कार करने। वह युवक भी उनके साथ चल पड़ा। कैंट स्टेशन पर बापू के आने की खबर शहर में आग की तरह फैल गई। कैंट स्टेशन पर भारी भीड़ जुट गई। भगदड़ हो गई। जिसमें दबकर उस युवक की जान चली गई थी।