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गगनयान: पैराशूट के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया क्लोजेट, एडीआरडीई ने किया तैयार

Fri, 23 Aug 2024 08:11 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा

सार

गगनयान मिशन के लिए एडीआरडीई आगरा के वैज्ञानिकों ने तैयार किया। अंतरिक्ष यात्रियों के लौटते वक्त लैंडिंग के पैराशूट इसमें रखे जाएंगे।
 
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एमसीपीएस ट्रायल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए आगरा के एडीआरडीई वैज्ञानिकों ने पूरी तरह से स्वदेशी या थु क्लोजेट का निर्माण किया है। इसमें गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर वापस लाने वाले पैराशूट और मिशन के टेक्सटाइल मैटेरियल को सुरक्षित रखा जाएगा। अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए जरूरी पैराशूट इस क्लोजेट के कारण 10 साल से ज्यादा चल सकेंगे।
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शुक्रवार को आगरा छावनी स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) परिसर में डीआरडीओ के महानिदेशक डॉ. एम जेड सिद्दीकी और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (इसरो) के निदेशक डॉ. एस उन्नीकृष्णन नायर ने एडीआरडीई के निदेशक डॉ. मनोज कुमार, सह निदेशक राजीव जैन, प्रोग्राम लीडर गगनयान स्वदेश कुमार के साथ या थु क्लोजेट का उद्घाटन किया। गगनयान में प्रयोग होने वाले क्रू मॉड्यूल के लिए इसे 1:8 के अनुपात में बनाया गया है, जो 5 डिग्री झुका हुआ है। क्रू मॉड्यूल ही गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर सुरक्षित लैंडिंग कराएगा। एडीआरडीई आगरा के वैज्ञानिकों ने उन्हें वापस लाने वाले पैराशूट सिस्टम को रखने, टेक्सटाइल मैटेरियल, फैब्रिक, रॉ मैटेरियल को रखने के लिए यह क्लोजेट बनाया है, जिससे पैराशूट की उम्र 10 साल से ज्यादा हो जाएगी।

 
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स्वदेशी सैन्य लड़ाकू पैराशूट प्रणाली का ट्रायल
आगरा के मलपुरा ड्रापिंग जोन में या थु क्लोजेट के उद्घाटन पर एडीआरडीई ने पूरी तरह से स्वदेशी सैन्य लड़ाकू पैराशूट प्रणाली का प्रदर्शन किया। विमान से 30 हजार फुट की ऊंचाई से फ्री फॉल और स्टेटिक फॉल जंप में इस पैराशूट का इस्तेमाल किया जा सकेगा। पैराट्रूपर्स इस पैराशूट सिस्टम में पैरा कंप्यूटर, ऑक्सीजन सिस्टम, बैलेस्टिक हेलमेट और स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली की मदद से निर्धारित जगह पर उतर सकेंगे।

 

मलपुरा में 200 से ज्यादा हो चुके ट्रायल
पैरा कमांडो को मिशन में सटीक जगह पर उतारने के लिए इस सैन्य लड़ाकू पैराशूट प्रणाली (एम सी पी एस) के 200 से ज्यादा ट्रायल किए जा चुके हैं। इसमें नेविगेशन सिस्टम अनूठा है। चीफ टेस्ट जंपर विंग कमांडर विशाल लोकेश वीएम (जी) ने मलपुरा ड्रापिंग जोन में इसका प्रदर्शन किया। इस दौरान इसरो और डीआरडीओ के वैज्ञानिक मनीष भटनागर, विपिन वर्मा, अनुराग यादव, ऋषभ सिंह, कृष्नेंदु और सुनील सैनी आदि मौजूद रहे।

 
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या थू क्लोजेट
गगनयान के यात्रियों को सुरक्षित लाने जमीन पर पहुंचाने के लिए जो पैराशूट प्रणाली प्रयोग होगी उसके लिए यह अलमारी बनाई गई है। इससे पैराशूट को किसी भी खतरे से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
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