निरीक्षक कमलेश सिंह के मुताबिक, मुकदमे में कहा गया है कि वर्ष 2016 में विवेक बैनारा ने उन्हें संयुक्त मार्केटिंग का प्रस्ताव दिया, इससे कि खर्चों में कटौती के साथ ही व्यापार में वृद्धि हो सके। प्रस्ताव पर उनकी सहमति के बाद उनकी कंपनी के प्रोडक्ट्स की विवेक बैनारा की कंपनी की निगरानी में बिक्री होने साथ उससे होने वाले लाभांश में 50 फीसदी हिस्सा उन्हें मिलना था।
आरोप है कि विवेक बैनारा ने उन्हें खाली चेक, फॉर्म आदि पर हस्ताक्षर करा लिए। उनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाते हुए कंपनी के पुराने कर्मचारियों को हटा दिया। धोखा देकर कंपनी कंपनी पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। उनके द्वारा हस्ताक्षर किए खाली चेक और फॉर्म आदि का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने अपने चेक वापस मांगे। मगर, उन्होंने लौटाए नहीं।
उन्होंने जून 2020 में विवेक बैनारा को नोटिस भी दिया। उनकी कंपनी के प्लांट और मशीनरी जिनकी कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा है, वह भी विवेक बैनारा नहीं लौटा रहे हैं। मुकेश बैनारा के अनुसार जीएसटी और आयकर विभाग के उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसको लेकर चार मार्च को वह अरतौनी स्थित फैक्टरी पर गए थे। मगर, चौकीदार ने उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया। धमकी देकर भगा दिया। उन्होंने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ। मुकदमा धारा 420, 406, 468, 471, 477-ए, 384, 504, 506, 120बी में दर्ज किया गया है। निरीक्षक का कहना है कि आरोपी फैक्टरी मालिक से बयान लेने सोमवार और मंगलवार को टीम भेजी गई है। विवेचना की जा रही है। दोनों साझीदार में विवाद है। साक्ष्य संकलन के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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