आगरा के रजिस्ट्री दफ्तर में बैनामों का फर्जीवाड़ा छह साल से चल रहा था। जिल्द से पन्ने फटते रहे। अभिलेख गायब हो गए। बैनामा, एग्रीमेंट से लेकर वसीयत तक में अदला-बदली कर फर्जी कागज लग गए। लेकिन, जिम्मेदार अफसर जांच व एफआईआर की बजाय शिकायतों को दबाए बैठे रहे।
मधु नगर निवासी सरोज देवी को फर्जी बैनामा से जमीन बेचने के मामले में एफआईआर के बाद जिला प्रशासन व निबंधन विभाग की नींद टूटी। जून 2024 में ही तत्कालीन महानिरीक्षक डॉ. रूपेश कुमार ने सभी निबंधन कार्यालयों में संरक्षित अभिलेखों की सैंपल जांच और फर्जीवाड़ा मिलने पर एफआईआर के आदेश दिए थे। लेकिन, जिला निबंधक से लेकर एआईजी व सब रजिस्ट्रार तक गड़बड़ियों पर मूक बने रहे। छह साल पहले नवंबर 2019 में सब रजिस्ट्रार तृतीय ने जिला निबंधक एडीएम वित्त को भेजी रिपोर्ट में अभिलेख, रिकॉर्ड पंजिकाओं में अदला-बदली एवं नष्ट होने के संबंध अवगत कराया था। निबंधन लिपिक सोबरन सिंह अभिलेखागार प्रभारी थे।
तब वर्ष 2000 से 2005 तक बही नंबर 3 में खंड व जिल्द का मिलान में गड़बड़ियां सामने आई थीं। बही नंबर 3 में दस्तावेज संख्या 45/2004 की नकल के लिए सावित्री देवी ने सवाल डाला। आवेदन का रिकॉर्ड रूम में इंडैक्स व स्याहा से मिलान किया तो पता चला कि दस्तावेज संख्या 45/2004 पर भगवान देवी पत्नी टीकाराम नाम अंकित है। जबकि जिल्द में गोरेलाल की वसीयत चस्पा थी। जिल्द 40 में चस्पा अन्य दस्तावेजों की जांच में दस्तावेज संख्या 1 पर भी ननिगा पुत्र वृद्धा का नाम अंकित मिला।
जबकि दस्तावेज संख्या 1 पर सुरजीत सिंह पुत्र प्रेम सिंह की वसीयत चस्पा मिली। इसी तरह संतोष भाटी ने बही संख्या 1 जिल्द संख्या 76 में दर्ज दस्तावेज संख्या 3228/1996 की नकल के लिए सवाल डाला। जिल्द खंगाली गई तो पता चला कि जिल्द संख्या 76 से आठ पन्ने फटे मिले। इंडैक्स व स्याहा से मिलान करने पर विक्रेता हरीशंकर लवालिया व क्रेता कस्तूरी देवी भूखंड संख्या 13 मौजा राजपुर दर्ज मिला। जबकि खंड में विक्रेता स्वप्निल सिंह व क्रेता राजीव गर्ग एवं नीरज गर्ग का नाम चस्पा था। इनके अलावा जिल्द संख्या 487, 634 और 1075 का रिकॉर्ड ही गायब मिला। सब रजिस्ट्रार की इस रिपोर्ट पर तत्कालीन जिला निबंधक ने जांच व एफआईआर तक नहीं कराई।