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यूपी: औरंगजेब की हवेली सहित चार धरोहर ध्वस्त, राजा जयसिंह के 17 वीं सदी के नक्शे में दर्ज है 35 नंबर हवेली

Fri, 03 Jan 2025 08:55 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

मुगलिया दौर के रिवरफ्रंट गार्डन का अहम हिस्सा मुबारक मंजिल अब ध्वस्त कर दी गई है। ये हवेली राजा जयसिंह के 17 वीं सदी के नक्शे में 35 नंबर के रूप में दर्ज है। 
 
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औरंगजेब की हवेली सहित चार धरोहर ध्वस्त - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मुगलिया सल्तनत की 197 से ज्यादा धरोहरों को समेटे आगरा में बीते तीन माह में मुबारक मंजिल (औरंगजेब की हवेली) समेत चार धरोहरों को ध्वस्त कर दिया गया। यमुना किनारे बने मुगलिया दौर के रिवरफ्रंट में 17 बाग और 28 हवेलियां थे, जिनमें से मुबारक मंजिल एक है। राजा जय सिंह के 17 वीं सदी के नक्शे में मुबारक मंजिल 35 नंबर पर दर्ज है, जिसे संरक्षण की अधिसूचना जारी करते ही ध्वस्त कर दिया गया। इसकी तरह छीपीटोला का शाही हम्माम, यमुना किनारे का जोहरा बाग और हाइवे पर लोदीकालीन मस्जिद का निशां ही मिट चुका है।
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दुनिया भर के सैलानी ताजमहल के साथ आगरा में मुगल काल की धरोहरों को देखने, उनकी वास्तुकला समझने आते हैं। 197 स्मारकों के शहर में जगह जगह मुगलिया धरोहरे हैं, जिनमें इतिहास छिपा है। बादशाह अकबर के काल से शहंशाह शाहजहां और औरंगजेब तक मुगलों के लिए अहम रही मुबारक मंजिल का नामोनिशान खत्म कर दिया गया है। महज तीन माह पहले ही राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित करने की अधिसूचना जारी की थी। 30 अक्तूबर तक आपत्तियां मांगी गई थी। अंतिम अधिसूचना से पहले ही औरंगजेब की हवेली पर बुलडोजर चलाकर जमीन को सपाट कर दिया गया है।

 

ब्रिटिश काल में नमक ऑफिस, रेलवे का गोदाम
ऑस्ट्रिया की इतिहासकार एब्बा कोच की पुस्तक रिवरफ्रंट गार्डन ऑफ आगरा में मुबारक मंजिल के बारे में विस्तृत ब्योरा दिया गया है। कोच ने इसे आलमगीर की हवेली बताया है, जहां शाहजहां, शुजा और औरंगजेब लंबे समय तक महत्वपूर्ण मौकों पर रहे। केवल मुगल काल नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल में वर्ष 1817 में इसमें कई बदलाव किए गए। यह दोमंजिला बनाई गई। वर्ष 1810 से 1877 तक यह नमक दफ्तर, कस्टम हाउस बना रहा। अंग्रेजी हुकूमत में मुबारक मंजिल को परमिट कोठी और फिर तारा निवास के नाम से जाना गया। वर्ष 1902 में लॉर्ड कर्जन ने यहां मुस्लिम समुदाय के पूजा करने के दावे को खारिज कर दिया था।

 

1868 के नक्शे में पुल के नजदीक दर्ज है धरोहर
वर्ष 1868 में बनाए गए आगरा के नक्शे में यह लोहे के मौजूदा पुल की जगह बने पैंटून पुल के पास दर्शाई गई है। ब्रिटिश काल में ही इंजीनियर एसी पोलव्हेल ने रिपोर्ट दी थी कि ईस्ट इंडियन रेलवे ने इसे माल डिपो बनाया। यहां संगमरमर की पट्टिका लगी थी, जिस पर लिखा था कि इसे सामूगढ़ की लड़ाई के बाद औरंगजेब ने बनवाया था। इसका ब्योरा कार्लाइल की वर्ष 1871 की रिपोर्ट में भी है। कार्लाइल ने मुबारक मंजिल की वास्तुकला को लेकर पूरा ब्योरा दिया है।

 

तीन माह में मिट गया इनका भी निशां
जोहरा बाग- एएसआई संरक्षित तीन मुगल शहंशाहों के दौर की वास्तुकला समेटे जोहरा बाग की तीन मंजिलें दिवाली पर गिर गईं। यहां तक संरक्षण के लिए ट्रैक्टर ले जाना भी मुश्किल है।
शाही हम्माम- मुगलिया दौर में वर्ष 1620 में अल्लावर्दी खां ने छीपीटोला में शाही हम्माम को बनवाया था। इसे बीते माह ही तोड़ जा रहा था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी।
लोदीकालीन मस्जिद- दिल्ली हाईवे पर कामायनी अस्पताल के सामने बाबरी मस्जिद की तरह बनी लोदीकालीन मस्जिद एडॉप्ट हेरिटेज में शामिल थी, लेकिन अक्तूबर में इसका गुंबद गिर गया।


 

टीम नहीं जा सकी
पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी राजीव त्रिवेदी ने बताया कि मैं लखनऊ में हूं। मेरी टीम बुधवार को जा नहीं सकी। बृहस्पतिवार को निरीक्षण के लिए टीम जाएगी। यह मुगलकालीन धरोहर है, इसे तोड़ा नहीं जा सकता। तोड़ने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 
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धरोहरों को सहेजने की जरूरत
आगरा सिविल सोसाइटी के राजीव सक्सेना ने बताया कि यह धरोहरें जीता जागता इतिहास है, जिन्हें सहेजने की जरूरत है। एसी कार्लाइल की रिपोर्ट में यह धरोहर दर्ज है तो एएसआई को इसका संरक्षण करना चाहिए। राज्य पुरातत्व विभाग इसके लिए गंभीर प्रयास करे, ताकि यह अराजकता और न फैले।
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