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काली कमाई से कई बने धनकुबेर: आरटीओ में 'ललित कुमार' अकेले नहीं! कई अधिकारी, जो जांच न होने से बचे

Fri, 10 Jul 2026 10:21 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मिलने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विभाग में लाइसेंस और वाहन फिटनेस से जुड़े भ्रष्टाचार को लेकर कई अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है।
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आगरा आरटीओ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के घर से आय से अधिक संपत्ति निकलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। संभागीय परिवहन विभाग में ऐसे ललित कुमार कई और हैं, जो जांच न होने की वजह से बचे रहते हैं। सबसे अधिक कमाई वाला आरआई के पद को माना जाता है। ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन फिटनेस की जिम्मेदारी सीधे इनकी होती है। ललित कुमार लाइसेंस के नाम पर पैसे मांगने की शिकायत में फंस गए।
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शासन के स्तर से ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस का कार्य प्राइवेट संस्थाओं के हवाले किया जा चुका है। इसकी एक वजह इन कार्यों की एवज में लोगों से धनराशि मांगने की शिकायत भी रही है। ललित कुमार कानपुर में लंबे समय तक आरआई पद पर रहे। यहीं पर उनकी शिकायत भी हुई। आगरा में प्रोन्नत होकर एआरटीओ प्रवर्तन बनकर आए। यहां पर उनके अधिकार सीमित रहे थे, जिसके कारण अधिक पंख नहीं फैला सके। इसके बाद भी उनका करीब पांच साल का कार्यकाल आगरा में विवादों से घिरा रहा। कार्यालय के अंदर भी अधिकारियों और कर्मचारी से कम मेलजोल नजर आता था।

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सैंया टोल पर चेकिंग के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। तब एक आरटीओ सिपाही ने भीड़ से उनको बचाया था। कुछ साल पहले तक लर्निंग और स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस कार्यालय से बनते थे। उस समय बाहरी लोग लाइसेंस बनवाने का ठेका लेते थे। बिना ड्राइविंग टेस्ट के आसानी से लाइसेंस बन जाते थे। इसकी स्वीकृति आरआई के स्तर से मिलती थी। ऐसे में संभागीय विभाग कार्यालय में और भी ललित हैं, जो जांच न होने की वजह से बचे रहते हैं।

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शासन लगातार कम कर रहा अधिकार
ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन फिटनेस का कार्य शासन के स्तर से प्राइवेट एजेंसियों के हवाले किया जा चुका है। इसके साथ नए वाहनों के कागजों की जिम्मेदारी वाहन डीलर्स को दी गई है। अब नए वाहन की फाइल आरटीओ में डीलर के माध्यम से ऑनलाइन आती है। यह सभी बदलाव भ्रष्टाचार को कम करने के लिए किए गए। इसी तरह वाहन परमिट के नियमों में भी बदलाव किए गए। शासन के स्तर से लगातार विभाग के अधिकार कम किए जा रहे हैं।

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एक दिन में बनते थे 350 लाइसेंस
आरटीओ में चार-पांच साल पहले एक दिन में करीब 350 ड्राइविंग लाइसेंस बनते थे। उस समय ड्राइविंग टेस्ट के लिए कोई सेंटर नहीं था। आरटीओ अधिकारियों के स्तर से पुलिस लाइन स्थित मैदान पर टेस्ट लिया जाता था। एक दिन में 350 लाइसेंस का ड्राइविंग टेस्ट होने पर सवाल खड़े होने पर इसका स्लॉट 150 किया गया था।

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