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यूपी: क्या आप भी भूल जाते हैं छोटी-छोटी बातें, ये आदतें आज ही छोड़ दें; बुढ़ापे से पहले ही इस बीमारी का खतरा

Mon, 21 Sep 2026 09:57 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

छोटी-छोटी बातें भूलना हमेशा सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। फोन नंबर, चाबी-चश्मा या हाल की घटनाएं बार-बार भूलना अल्जाइमर जैसी समस्या के संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से दिमागी कसरत कम हो रही है। नियमित पढ़ाई, खेल, व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ खानपान को उपयोगी बताया गया है।
 
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छोटी-छोटी बातें भी भूल रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पढ़ाई-लिखाई या जरूरी बौद्धिक कार्य झट से एआई से करा लिया। गुणा-भाग करना हो तो मोबाइल से कर लिया। तकनीक पर बढ़ती निर्भरता से दिमागी कसरत कम हो गई है। इसका सीधा असर याददाश्त पर पड़ रहा है। बच्चों-युवाओं को भी छोटी-छोटी बातें याद नहीं रह रही हैं। ऐसे में बुढ़ापे से पहले अल्जाइमर का खतरा बढ़ गया है।
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मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि पहले पढ़ाई-लिखाई या किसी तरह के प्रोजेक्ट पर दिमागी मंथन करते थे। कई बार प्रयास के बाद कोई हल नहीं निकलता था तो शिक्षक या जानकार की मदद लेते थे। अब किसी तरह की उलझन होने पर उसे हल करने के लिए कोई भी ज्यादा माथापच्ची नहीं करता है। तकनीक का अधिक साथ दिमाग को कमजोर कर रहा है। इसका असर याददाश्त और बौद्धिक स्तर पर पड़ रहा है। उम्र बढ़ने पर दिमाग में मौजूद रसायनों के असंतुलन से नसें सिकुड़ने लगती हैं। इससे अल्जाइमर जैसी बीमारी पनप रही है।


 

हर सप्ताह आ रहे 25-30 मरीज
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की जेरियाट्रिक ओपीडी में सप्ताह में 25-30 मरीज आ रहे हैं जिनमें भूलने की बीमारी परेशानी पाई जा रही है। निदेशक ने बताया कि यदि बुजुर्ग ताजी घटनाएं भूल जाएं और पुरानी याद रखें, भोजन-दवा लेने के बाद भी फिर से मांग करें तो विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराएं। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टेलीमानस नंबर 14416 पर 24 घंटे फोन कर काउंसिलिंग का भी लाभ ले सकते हैं।

 


एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि मोबाइल, टीवी, लैपटॉप का लोग औसतन 4-5 घंटे उपयोग कर रहे हैं। अब ओटीटी, शॉर्ट फिल्म का चलन बढ़ने से समय और बढ़ रहा है। इससे दिमाग थक रहा है और नसों पर प्रभाव पड़ रहा है। ओपीडी में 40-50 की उम्र के ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्हें फोन नंबर, चाबी-चश्मा भूलने, ताजी घटनाएं भी याद न रख पाने की समस्या हो रही है। इसे शुरुआत में लोग सामान्य तौर पर काम का दबाव मानते हैं लेकिन ये बीमारी के संकेत हैं।



 

केस एक: निजी कंपनी में कार्यरत दयालबाग निवासी 42 वर्षीय व्यक्ति लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल करते हैं। शुुरू में पर्स-कार की चाबी भूलने की समस्या हुई। धीरे-धीरे घर के जरूरी कार्य भूलने लगे। शुरुआत में इसे कार्य का अधिक दबाव समझा। समस्या बढ़ने पर डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो बीमारी का पता चला।

 

केस दो : सदर निवासी 66 साल के बुजुर्ग भोजन, दवा लेने के बाद भूल जाते हैं। दोबारा खाना मांगने पर परिजन बताते कि आप खा चुके हो लेकिन वे नहीं मानते। इसकी बेटे से शिकायत की। बेटे-बहू में झगड़ा हो गया। समस्या गंभीर होने पर बेटे ने डॉक्टर को दिखाया तो बीमारी का पता चला। अब उनका इलाज चल रहा है।

 
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दिमागी कसरत के लिए ये करें:
शतरंज, लूडो, सांप-सीढ़ी, कैरम बोर्ड खेलें। तनाव से बचें।
रोजाना घंटेभर किताब, अखबार, मैगजीन पढ़ने की आदत डालें।
मोबाइल, एआई और अन्य तकनीकी संसाधनों पर निर्भरता कम करें।
6-8 घंटे की नींद लें, रोजाना पैदल चलें, व्यायाम करें।
खाने में पौष्टिक और मोटा अनाज, फल, ड्राईफ्रूट्स, दाल और हरी सब्जी का प्रयोग करें।
रोजाना योग करें और ध्यान लगाएं।
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