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बाढ़ प्रभावित इलाकों में ढर्रे पर नहीं लौट पा रही जिंदगी

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कासगंज। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के सामने जिंदगी से जुड़ी तमाम समस्याएं हैं। वहां का जनजीवन अभी ढर्रे पर नहीं लौट पा रहा है। ग्रामीण तमाम चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। तमाम झोंपड़िया और कच्चे मकान अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। हालांकि गंगा का जलस्तर बुधवार को 15 सेंटीमीटर और कम होकर 163.50 हो गया है। लेकिन जिन इलाकों में पानी भरा हुआ है। वहां से निकासी नहीं हो पाई है। लगातार जलभराव होने के कारण मच्छरों के पनपने से संक्रामक रोगों का खतरा बनने लगा है।
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पटियाली इलाके के कई गांव अभी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। नगला मुंता, नगला मोहन, खिमाई नगला, पनसोती नगला, नगला मनी, नगला खेड़ा, नगला डामर, जिजौल, नगला खुर्द, बझेरा, नगला जगमोहन, नौली फतुहाबाद, रामताल, टिकुरी नगला, नगला दुलार, सिकहरा इन गांव की आबादी व रास्तों में पानी भरा है। आवागमन प्रभावित है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाके के किसानों को काफी समस्याएं हैं।
मक्का, बाजरा, शकरकंदी, अरबी की फसलें नष्ट हो गई हैं। कादरगंज के असलम खान ने बताया कि गांव में पानी भरा हुआ है। इससे काफी दिक्कतें हो रही हैं। लोग कहीं आ जा नहीं पा रहे। खेतों में पानी भरा होने के कारण पशुओं के लिए चारे की समस्या बनी हुई है। मेहंदी हसन, यदम ठाकुर, इरशाद खां का कहना है कि गंगा का पानी अभी निकल नहीं पा रहा। खेतों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। जब पानी उतरे तभी फसलों की क्षति का आकलन हो पाएगा। हालात खराब हो रहे हैं।
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जलस्तर का लेखा जोखा
- 90670 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 90837 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 76575 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
वर्जन-
- गंगा का जलस्तर लगातार घट रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी की निकासी शुरू हो चुकी है। धीमे-धीमे राहत लौटेगी। स्वास्थ्य टीमें लगातार ग्रामीणों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर रही हैं। किसी भी तरह की दिक्कतें ग्रामीणों को न हों इसके लिए पटियाली तहसील प्रशासन को निर्देशित किया गया है।- अजय श्रीवास्तव, एडीएम।
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