चंबल में बाढ़ से टीले पर टेंट लगाकर रहते लोग।
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बाह पिनाहट। चंबल में आई बाढ़ की विभीषिका से बाह तहसील के 38 गांवों की 20 हजार की आबादी जूझने को मजबूर है। गांव अंधेरे में हैं। रास्तों में पानी भरा होने से बाहर निकलना मुश्किल है। 3 हजार से ज्यादा रकबे में बाजरा, तिल और सब्जियों की फसलें तबाह होने का अंदेशा है। शनिवार को बाह के एसडीएम ने बाढ़ से मकान, कृषि के नुकसान के आंकलन के लिए कर्मियों को लगाया। जो गांव और खेत खाली हुए हैं, उनमें नुकसान का आंकलन तत्परता से करने के निर्देश दिए हैं।
बृहस्पतिवार को चंबल नदी ने खतरे के निशान 130 मीटर को पार कर 134 मीटर का निशान छू लिया था। राहत की बात ये है कि दो दिन में 8.5 मीटर की गिरावट के साथ नदी का जलस्तर 127.5 मीटर रह गया है। पुरा डाल और पुरा शिवलाल गांव का रास्ता खुल गया है। बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे बाह के गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, मऊ की मढै़या, झरनापुरा, भगवानपुरा, पिनाहट के रेहा, कछियारा, डगोरा के लोग अपने गांव का रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने बचाव और राहत के लिए रानीपुरा, भटपुरा, गोहरा, सिमराई, झरनापुरा, रेहा के लिए मोटरबोट की व्यवस्था की है। गुढ़ा गांव के रास्ते में कीचड़ होने से मोटरबोट का संचालन बंद हो गया है। उधर, गांव उमरैठापुरा के ग्रामीण रामनरेश, आसारा, देवेंद्र सुनीराम,राजकुमार,अभिलाष राजेंद्र, होशियार सिंह, तहसीलदार, रमेश ,बृजमोहन राजू ने बताया घर में पानी भरने से दीवारों में दरारें आ गई हैं। सीलन के कारण कुछ घर गिर चुके हैं। बाह के एसडीएम हेमंत कुमार ने बताया कि जलस्तर लगातार घट रहा है। प्रभावित गांवोंं में रसद पहुंचाई जा रही है।