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Agra News: कोर्ट का फर्जी आदेश बनाने के पांच दोषियों को पांच वर्ष की जेल, चार आरोपियों को कराया था बरी

Tue, 13 Aug 2024 09:36 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में कोर्ट का फर्जी आदेश बनाने वाले पांच दोषियों को पांच वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई। इन्होंने चार आरोपियों को बरी कराया था। 
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कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में लिपिक ने कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के चार आरोपियों का बरी करा दिया था। मामले में जांच के बाद लिपिक सहित पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। एसीजेएम -2 बटेश्वर कुमार ने न्यायालय के बर्खास्त जगदीशपुरा निवासी लिपिक पवन अग्रवाल सहित पांच को दोषी पाते हुए पांच साल कारावास के साथ 20 हजार रुपये दंड की सजा सुनाई है।

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थाना न्यू आगरा में दर्ज मुकदमे के अनुसार पीड़ित ने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। आरोप लगाया था कि पथौली निवासी उसके चाचा अशोक, लवकेश चाची मीरा देवी और आशा देवी उसके प्लॉट पर जबरन कब्जा करना चाहते थे। आरोपियों ने उनसे और उनकी मां के साथ मारपीट कर गंभीर घायल कर दिया था। उनके पिता ने 2004 में आरोपियों के मुकदमा दर्ज कराया।

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कोर्ट के लिपिक पवन अग्रवाल से मिलकर षड्यंत्र के तहत रिहाई का कूट रचित आदेश तैयार कराकर वो मुकदमे से बरी हो गए। तत्कालीन मजिस्ट्रेट, स्टेनो ने ऐसा कोई आदेश पारित एवं टाइप करने से स्पष्ट मना किया था। जिला जज ने लिपिक पवन अग्रवाल को बर्खास्त कर दिया था। 
 
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अदालत के आदेश पर आरोपियों व लिपिक के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में तो मुकदमा दर्ज हुआ ही, पुराना मुकदमा भी नए सिरे से शुरू हो गया था। मामले में अभियोजन की तरफ से पीड़ित, कुशाल सिंह स्टेनो अनिल कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक राजेंद्र प्रसाद, डीएसपी श्याम कांत, अपर पुलिस अधीक्षक नम्रता सिंह, सीओ चमन सिंह चावड़ा को गवाही के लिए अदालत में पेश किया गया।
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