कासगंज के सिकंदरपुर वैश्य क्षेत्र में रविवार की सुबह खंदी में भरा बारिश का पानी मौत का सबब बन गया। पशु चराने जा रहे गांव नगला बख्शी के सात बच्चे खंदी के पानी में डूबे गए।
पांच बच्चों को बचा लिया गया, लेकिन दो बच्चों की मौत हो गई। हादसे से परिवार और गांव में कोहराम मच गया। अफसर भी सूचना पर गांव पहुंच गए। पीड़ित परिवारीजनों को मदद का भरोसा दिया।
गांव के बच्चे रोज की तरह अपने पशुओं को जंगल की ओर चराने ले जा रहे थे। गांव की सड़क के किनारे की गहरी खंदी में बारिश का पानी एकत्रित था। पशु पानी में अचानक घुस गए।
इन बच्चों की हुई मौत
पशुओं को पानी में उतरता देख बच्चे भी उनके पीछे ही पानी में घुस गए। खंदी में पानी ज्यादा होने के कारण बच्चे डूबने लगे। इस बीच दो बच्चे अपना बचाव करते हुए बाहर निकल आए।
उन्होंने शोर मचाया और ग्रामीणों को सूचना दी। ग्रामीण मौके पर आ गए। ग्रामीणों ने खंदी में डूबे बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन दो बच्चों की मौत हो गई। मृतक बच्चों में मंजीत (12) पुत्र नरेशपाल और विपिन (11) पुत्र लालाराम थे।
वहीं विपिन का भाई भानु 8 वर्ष, विश्वजीत पुत्र संतोष, प्रदीप पुत्र कुंवरपाल, सचिन पुत्र रामौतार, सुमित पुत्र तोताराम को बचा लिया गया। दो बच्चों की मौत की सूचना मिलते ही परिवारों में कोहराम मच गया।
शवों का नहीं कराया पोस्टमार्टम
हादसे से गांव के लोग भी सहम गए। सूचना पर एसडीएम धीरेंद्र सिंह, तहसीलदार इमराज सिंह के अलावा सिंकदरपुर वैश्य, सुन्नगढ़ी एवं पटियाली की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। एसडीएम ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया।
दोनों बच्चों के परिवारीजनों ने बच्चों के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया है। एसडीएम एवं थाना प्रभारी ने उनको काफी समझाया। एक बार परिवारीजन तैयार हो गए तो गांव के अन्य लोग मना करने लगे। इसके बाद पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।
एसडीएम धीरेंद्र सिंह ने कहा कि बारिश के पानी में डूबने से बच्चों की मौत हुई है। बच्चों के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है। यह दुर्घटना देवीय आपदा की श्रेणी में नहीं आती है। जिससे आर्थिक मुआवजा नहीं मिल पाएगा।