मैनपुरी। आज कारगिल विजय दिवस है। कारगिल में देश की रक्षा करते हुए जिले के पांच रणबांकुरों ने वीरगति पाई थी। जिले में बने स्मारक उनकी वीर गाथाओं की याद दिलाते हैं।
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तीन जून को शहीद हुए थे प्रवीन
मैनपुरी ब्लाक क्षेत्र के ग्राम अंजनी निवासी ग्रेनेडियर सिपाही प्रवीन कुमार ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून 1999 को शहादत पाई थी। उन्होंने अपने साथी मुनीष कुमार के साथ मिलकर कई दुश्मन जवानों को मारने के बाद सीमा की रक्षा करते हुए प्राणों का उत्सर्ग किया। गांव में बना स्मारक उनके बलिदान की मूक गवाही देता नजर आता है। प्रवीन की पत्नी सुमन यादव का कहना है कि देश की रक्षा के लिए नौजवानों को आगे आना चाहिए।
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युवा देश की रक्षा में पीठ न दिखाएं: मोमना
कारगिल युद्ध के दौरान तीन जुलाई 1999 को किशनी को गांव दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन शहीद हो गए थे। अमरुद्दीन की किशनी में प्रतिमा स्थापित की गई है। अमरुद्दीन की पत्नी मोमना बेगम का कहना है कि पति देश की रक्षा के लिए बलिदान हुए। मैं जिले के युवाओं से अपील करती हूं के वे देश की रक्षा के लिए कभी पीठ न दिखाएं। वे अपने परिवार के लोगों को भी सेना में जाने के लिए प्रेरित करेंगी।
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तीन जून को मुनीष ने पाई थी वीरगति
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए बेवर क्षेत्र के ग्राम गढ़िया घुटारा के ग्रेनेडियर सिपाही मुनीष कुमार तीन जून 1999 को शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद गांव में बना स्मारक उनकी शहादत की याद दिलाता है। उनके माता-पिता गांव में रहते हैं। पत्नी मंजू यादव भरथना में रहकर बच्चों को पढ़ा रही हैं। पत्नी मंजू यादव का कहना है कि देश के युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे देश हित में काम आएं।
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युवाओं को करा रहे सेना की तैयारी
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों के साथ युद्ध में घिरोर क्षेत्र के गांव शाहजहांपुर निवासी सत्यदेव सिंह 24 जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे। उनके भाई शिवमंगल सिंह का कहना है कि वे अपने परिवार के अन्य युवाओं को भी सेना की तैयारी करा रहे हैं। उनके परिवार के युवा सेना में जाकर देश की रक्षा के लिए मर मिटने को तैयार हैं। उन्होंने जिले के युवाओं से अपील की कि देश हित के लिए वे सेना में नौकरी करें।
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हेमचरन की मां को बेटे पर गर्व
औंछा औंछा क्षेत्र के ग्राम नगला आंध्रा निवासी हेमचरण कारगिल की लड़ाई में 23 जुलाई 1999 को शहीद हो गये थे। हेमचरण की मौत के बाद उनकी पत्नी का 2005 में निधन हो गया था। पिता की भी दिसंबर 2020 में मौत हो गई। मां रामश्री कहती हैं कि मुझे बेटे की वीरता पर गर्व है। उनकी जिले के युवाओं से अपील है कि वे देश की रक्षा के लिए कभी पैर पीछे न रखें। मौका मिले तो सेना में नौकरी कर भारत माता की रक्षा करें।
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सैनिकों के आश्रितों के लिए हो रही हैं कई योजनाएं संचालित-
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सेवानिवृत्त सैनिकों को समूह ग और घ में पांच प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है वहीं सेवानिवृत्त सैनिकों को 20 लाख तक के आवासीय भूखंड की खरीद पर स्टांप ड्यूटी में छूट का प्रावधान है। शहीद सैनिकों के परिवारों को 50 लाख की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान करने, मेडिकल, इंजीनियरिंग, व्यावसायिक कालेजों में सेवानिवृत्त सैनिकों के पुत्र/पुत्रियों को सीटों में आरक्षण की व्यवस्था है। सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों को नि:शुल्क एसएसबी, कंप्यूटर टैली प्रशिक्षण, इंफारमेशन टेक्नोलॉजी प्रशिक्षण, कम्प्यूटर फैशन डिजाइनिंग प्रशिक्षण की व्यवस्था है। द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों/दिवंगत सैनिकों की पत्नियों को 6,000 रुपये प्रतिमाह का अनुदान दिया जा रहा है। सेवानिवृत्त सैनिकों की पुत्री के विवाह के लिए एक लाख की सहायता राशि प्रदान की जा रही है।
कमांडर नवीन कटियार, जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी