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पढ़ें, अटल जी की पहली कविता, जो बयां करती है ताजमहल बनने के पीछे की सच्चाई

Fri, 17 Aug 2018 02:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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फाइल फोटो
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भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दुनिया के महानतम नेताओं में गिना जाता है। वो एक प्रखर राजनीतिज्ञ के साथ सशक्त वक्ता, कवि और पत्रकार भी हैं। उन्होंने दिल छूने और जोश भर देने वाली कविताएं लिखी हैं।
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अटल जी की हर कविताओं में जनमानस के लिए एक सीख होती है। उन्होंने अपनी कविताओं से समाज को वास्तविकता का आईना दिखाने का प्रयास किया है। इसका प्रमाण उनकी पहली कविता से भी दिखाई देता है। 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बहुत कम उम्र में कविता लिखनी शुरू कर दी थी। वाजपेयी ने अपनी जिंदगी की पहली कविता ताजमहल पर लिखी थी। यह उन्होंने खुद अपनी कविताओं के संग्रह की भूमिका में लिखा है। 
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अटल जी की पहली कविता न तो ताजमहल की खूबसूरती पर है, और न ही मुमताज के लिए शाहजहां के प्यार पर आधारित है। यह कविता उन श्रमिकों पर आधारित थी, जिन्होंने भव्य इमारत का निर्माण किया था। और कहा जाता है कि श्रमिकों के हाथ कटवा लिए गए थे।  

अटली जी की पहली कविता के कुछ अंश

'यह ताजमहल, यह ताजमहल
यमुना की रोती धार विकल
कल कल चल चल 
जब रोया हिंदुस्तान सकल
तब बन पाया ताजमहल
यह ताजमहल, यह ताजमहल..!!'

आज भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सेहत बेहद नाजुक बनी हुई है। दिल्ली के एम्स में उनको फुल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। लोग उनके जल्द स्वस्थ्य होने की कामना कर रहे हैं।  
 
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