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वेबसाइट पर सेकेंड डिवीजन को फर्स्ट डिवीजन में बदला

Wed, 04 May 2016 01:32 AM IST
अमर उजाला आगरा
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काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर - फोटो : अमर उजाला
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डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी में इस बार आनलाइन मार्कशीट का फर्जीवाड़ा सामने आया है। वेबसाइट पर अंक बढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे भी मामले हैं, जिनमें पहले अपलोड की गई मार्कशीट में छात्र की सेकेंड डिवीजन थी, जबकि दूसरी बार अपलोड मार्कशीट में फर्स्ट डिवीजन हो गई। यूनिवर्सिटी के अफसर यह जानकर हैरान है कि अंक एक नहीं, सभी विषयों में बढ़ाए गए हैं। वो भी 10 से लेकर 20 तक। 13 के 33 और 18 के 28 किए गए हैं। इस परीक्षार्थी को पिछले साल 49 फीसदी अंक मिले थे, लेकिन वेबसाइट पर रिजल्ट बदल दिए जाने से अंक 60 फीसदी हो गए हैं।
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विवि सूत्रों ने बताया कि बीएससी में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हैं। मामला 2014 के रिजल्ट का है। रिजल्ट उसी साल 21 अक्तूबर को जारी किया गया था। ऐसे भी मामले हैं, जिनमें पांच-पांच विषयों में नंबर बढ़े हुए हैं। सांख्यिकी में 13 को 33, गणित में 18 को 38 और कंप्यूटर साइंस में 27 को 37 किया गया है।
2015 की मार्कशीट में कुल योग 289 है जबकि 2016 में फिर से अपलोड की गई मार्कशीट में यह 362 हो गया है। एक अन्य विद्यार्थी की मार्कशीट में कुल योग 294 को 364 किया गया है। बता दें, यूनिवर्सिटी फर्जीवाड़ों के लिए बदनाम है। बीएड में हुई धांधली की जांच एसआईटी कर रही है।
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नंबर कम होने पर देना होता री-एग्जाम
विवि की नियमावली अनुसार, परीक्षार्थी को री-एक्जाम का फार्म भरना होता है। इसमें भी दो विषयों के तीन पेपरों में री-एग्जाम की छूट है। वेबसाइट से प्रिंट मार्कशीट में स्पष्ट रूप में लिखा है कि परीक्षार्थी के नाम, पिता, कालेज संबंधी जानकारी में गड़बड़ी होने पर कालेज या विश्वविद्यालय में आवेदन देना होता है। लेकिन पकड़ी गई मार्कशीट में कई पेपरों में नंबर बढ़े हुए हैं।

- मामला गंभीर है, यह गड़बड़ी नंबर फीडिंग में हुई है या फिर फर्जीवाड़े का खेल है। इस मामले की उच्चतरीय जांच कराई जाएगी। 
- केएन सिंह, परीक्षा नियंत्रक
अलग-अलग नंबरों की मार्कशीट का क्या मामला है। इसकी रिपोर्ट परीक्षा नियंत्रक से मांगी जाएगी है। 
- प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल, कुलपति  

कार्य करने वाली एजेंसी जांच के दायरे में
विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड मार्कशीट में नंबरों के खेल के बाद रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी जांच की जद में आ गई है। इससे पहले यहां ब्लैंक मार्कशीट बाजार में बिकने का भी मामला सामने आया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी जांच में रुचि नहीं दिखाई।
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