आवंटन के बाद निरस्त करनी पड़ी थीं दुकानें
पिछले साल कोरोना काल में पटाखा बाजारों के लिए दुकानें आवंटित होने के बाद डीएम प्रभु एन सिंह को त्योहार से दो दिन पहले आवंटन निरस्त करने पड़े थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश प्राप्त होने के कारण आवंटियों को उनके द्वारा जमा कराई जमानत राशि जिला प्रशासन ने वापस कराई थी।
50 से 70 करोड़ का कारोबार
ताजनगरी में ऐसा दूसरी बार होगा जब पटाखे नहीं चलेंगे। 2019 और उससे पहले तक दिवाली के त्योहार पर 50 से 70 करोड़ रुपये का पटाखों का कारोबार होता था। घनी बस्तियों से लेकर गांव-देहात तक पटाखा गोदाम हैं। जहां छह महीने पहले से ही पटाखों का निर्माण व स्टॉक शुरू हो जाता था।
हादसों में आएगी कमी
पर्यावरण विशेषज्ञ बृज खंडेलवाल ने बताया कि पटाखों पर स्थाई रोक लगने से त्योहार पर होने वाले हादसों में कमी आएगी। 2019 में 54 हादसे हुए थे। 24 घंटे जिला अस्पताल व एसएन की इमरजेंसी खुली रहती थीं। ताकि हादसा होने पर घायलों को उपचार मिल सके।
संवेदनशील क्षेत्र घोषित है शहर
ताज ट्रिपिजयम जोन (टीटीजेड) के तहत पर्यावरणीय दृष्टि से ताजनगरी संवेदनशील क्षेत्र घोषित है। पटाखों में इस्तेमाल होने वाले गंधक, पोटाश व अन्य गोला-बारुद से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ता है। हवा में प्रदूषण बढ़ने से सांस व अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।