आगरा के हरीपर्वत थाना में इंस्पेक्टर महेश चंद गौतम का 10 हजार रुपए की कीमत का ब्रांडेड चश्मा चोरी होने की रिपोर्ट घटना के 10 मिनट बाद ही दर्ज कर ली गई। यह वहीं थाना है, जहां वाहन चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने केलिए लोगों को 10 दिन तक चक्कर काटने पड़ते हैं। पीड़ित को पुलिस के 10-20 सवालों का सामना भी करना पड़ता है।
जिले में सबसे ज्यादा वाहन चोरी हरीपर्वत थाना क्षेत्र में होती है। यहीं भगवान टाकीज से सेंट जोंस तक बसों में जेब तराशी की जाती है। लोगों के पर्स और मोबाइल चोरी कर लिए जाते हैं। ऐसे मामलों को पुलिस चोरी में दर्ज नहीं करती। पीड़ित से कहा जाता है कि वो गुमशुदगी की तहरीर दे, इस पर पुलिस मुहर लगाकर उसे चलता करती है।
अधिवक्ता चौधरी अजय सिंह बताते हैं कि थानों पर पीड़ितों से तरह तरह के सवाल किए जाते हैं। काफी लोग तो रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोर्ट की शरण में जाते हैं। वाहन चोरी में पीड़ित से कहा जाता है कि वो बाइक के कागजात लाए, डीएल दिखाए। इसके बाद जांच की जाती है कि चोरी हुई या नहीं। तब रिपोर्ट लिखने का नंबर आता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अचल शर्मा कहते हैं कि तहरीर देने पर भी थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं होती है।