इस तरह से इन लोगों ने गलत प्रस्ताव को जायज ठहराने की कोशिश की। कई शिकायतों के बाद भी उक्त मामले में जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उनके द्वारा न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
हर जगह की शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
सिपाहीराम का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी होने पर 19 नवंबर 2020 को निदेशक स्थानीय निकाय लखनऊ से शिकायत की। इसके बाद 24 नवंबर 2020 को जिलाधिकारी से शिकायत की। इसके बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों और संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायतें की, लेकिन अफसरों ने कार्रवाई नहीं की। मजबूरन उसे न्यायालय में शरण लेनी पड़ी।
ईओ बोले, शासनादेश के तहत हुई नियुक्ति
ईओ दुर्गेश कुमार का कहना है कि शिकायतकर्ता ने नगर पंचायत किशनी की जमीन पर कब्जा किया हुआ है। उनका मकान भी कब्जे की जमीन पर बना है। इस मामले में नगर पंचायत कोर्ट में मुकदमा लड़ रही है। उसी मुकदमे में फर्जी दबाव बनाने के लिए झूठे आरोप लगाए गए हैं। संबंधित सफाईकर्मी को शासनादेश के तहत बोर्ड प्रस्ताव के आधार पर पदोन्नति देकर लिपिक पद पर नियुक्ति दी गई है।
सीओ भोगांव चंद्रकेश सिंह ने कहा कि मामला न्यायालय के आदेश पर दर्ज किया गया है। थाना पुलिस गंभीरतापूर्वक विवेचना करेगी। विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।