वर्ष 1963 में वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने पेश किए बजट में सर्वाधिक टैक्स लगाए। उस समय चीन से जंग के बाद देश की अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई थी। सरकारी खजाना खाली हो गया था। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने हर क्षेत्र में कर लगाए और युद्ध में देश के हालात को देखते हुए रक्षा व्यय को तरजीह दी। यह समय की दरकार थी।
अमर उजाला के 1 मार्च, 1963 के अंक में प्रकाशित खबर के अनुसार,1962 के भारत-चीन युद्ध में भारतीय सैन्य पराजय के बाद जब 1963 में बजट पेश किया गया तो रक्षा व्यय पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया। उस समय मोरारजी देसाई वित्त मंत्री थे। उन्होंने भारत चीन युद्ध में रक्षा संसाधनों की कमी को ध्यान में रखकर कुल बजट से 867 करोड़ रक्षा बजट के लिए तय किए जो 1962 में पेश रक्षा बजट से 361 करोड़ रुपये ज्यादा थे। देसाई ने 274 करोड़ 50 लाख रुपये के केंद्रीय कर भी लगाए। आजादी से 1963 तक किसी वित्त मंत्री ने ऐसा कदम नहीं उठाया था।
पहली बार कृषि आय पर लगा टैक्स
वर्ष 1973 में केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंतराव चव्हाण ने अपने बजट में कृषि आय पर कर लगा दिया था। यह टैक्स केएन राज समिति की सिफारिश पर लगाया गया। इसके बाद खाद्यान्नों में तेजी आ गई। बजट पेश होने के बाद दिल्ली के बाजारों में वस्तुओं के दाम बहुत बढ़ गए। व्यापारियों ने ज्यादा लाभ कमाने के लिए अपनी दुकानें बंद कर दी। वर्तमान में कृषि आय कर से पूर्णत: मुक्त है। चव्हाण ने शरणार्थी कर भी समाप्त कर दिया। रक्षा व्यय में कोई वृद्धि नहीं की।
पीएम पद पर रहते हुए राजीव गांधी ने पेश किया बजट
राजीव गांधी ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने आम बजट पेश किया। यह बात वर्ष 1987 की है। उस समय उनके पास वित्त मंत्री का भी कार्यभार था। उन्होंने देश की सुरक्षा पर बढ़ते खतरे को देखते हुए पिछली बार के रक्षा बजट के मुकाबले 2318 करोड़ की वृद्धि की। यह पहली बार था जब कुल बजट का 17 प्रतिशत रक्षा के लिए रखा गया।
पहली बार दुर्घटना बीमा की घोषणा
विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 1986 के बजट में पहली बार सफाई कर्मचारी और रेलवे कुलियों के दुर्घटना बीमा की घोषणा की थी। साथ ही इंदिरा आवास योजना की भी शुरुआत की गई। वीपी सिंह ने अपने बजट में भारतीय सीमाओं पर दबाव को देखते हुए रक्षा के लिए 8728 करोड़ रुपये सुनिश्चित किए थे।