भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने उत्तर प्रदेश सहकारिता संघ (यूपीपीसीएफ) की ओर से क्रय केंद्रों पर खरीदे गए गेहूं से भरे नौ ट्रकों को गोदाम से लौटा दिया है। बोरे मानकों के अनुरूप न होना बताया। खास बात यह है कि बोरे पूरे प्रदेश में शासन स्तर से ही उपलब्ध कराए गए हैं।
उत्तर प्रदेश सहकारिता संघ के जिले में 23 केंद्र हैं। यहां खरीदे गए गेहूं मंगलवार को नौ ट्रकों से एफसीआई के अर्जुन नगर स्थित गोदाम में भेजे गए। एफसीआई के अधिकारियों ने बोरों की गुणवत्ता देख गेहूं लेने से मना कर दिया। इससे पीसीएफ के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले की जानकारी अपर जिलाधिकारी नागरिक आपूर्ति और क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक को दी गई। बुधवार को शासन स्तर से गेहूं लिए जाने के निर्देश एफसीआई को जारी किए गए। हालांकि बुधवार-गुरुवार को अवकाश होने से गेहूं के सभी ट्रक क्रय केंद्रों पर भेज दिए गए। शुक्रवार को दोबारा एफसीआई के गोदाम पर भेजे जाएंगे।
45 हजार रुपये का नुकसान हुआ
ट्रक का भाड़ा और मजदूरी मिलाकर प्रत्येक ट्रक पर औसतन 5000 रुपये खर्च हुए। नौ ट्रकों को लौटाए जाने से करीब 45000 रुपये का नुकसान हुआ है।
‘पूरे प्रदेश में शासन से जो बोरे उपलब्ध कराए गए हैं, उन्हीं में गेहूं की खरीद की गई है। मथुरा-अलीगढ़ में इन्हीं बोरों में खरीद की गई। आगरा में एफसीआई ने बोरों को मानक के अनुरूप न बताकर ट्रक लौटा दिए।’
- सुशील कुमार, जिला प्रबंधक, उत्तर प्रदेश सहकारिता संघ
‘भारतीय खाद्य निगम उन्हीं बोरों में गेहूं लेने के लिए तैयार हो गई है। शासन स्तर से निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। शुक्रवार से गेहूं भेजे जाएंगे।’
- कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव, क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक