दबाव की राजनीति नहीं चलेगी, कोर्ट जाएं फरियादी
एसडीएम सचिन राजपूत ने कहा कि लेखपाल की पुरानी रिपोर्ट सही थी। यह मामला पूरी तरह से निजी आवासीय संपत्ति के कब्जे का है, जिसमें राजस्व विभाग सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि मौके पर पुराने मकान बने हैं, जो निजी संपत्ति का हिस्सा हैं, इसलिए इसका निस्तारण केवल माननीय सिविल न्यायालय (दीवानी अदालत) के माध्यम से ही संभव है।
सरकारी कार्य में न डालें बाधा
तहसील परिसर में शासकीय कार्य में बाधा डालकर दबाव बनाना उचित नहीं है। फरियादी को कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।— सचिन राजपूत, एसडीएम सदर
करेंगे आमरण अनशन
हमें न्याय नहीं मिला, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय पर आमरण अनशन करेंगे। पुलिस और प्रशासन ने अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कारवाई नहीं की। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही। - किशन सिंह बघेल, पीड़ित
http://