शिक्षा सत्र 2004-05 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम पर बड़ी संख्या में बीएड की फर्जी डिग्री और अंकपत्र जारी किए गए। मामले की एसआईटी जांच हुई तो पता चला कि प्रदेश भर में 4570 लोग फर्जी बीएड की डिग्री के सहारे शिक्षक बने हैं।
एसआईटी ने प्रदेश भर के फर्जी शिक्षकों की सूची तैयार कर सीडी नवंबर 2017 में बीएसए को भेजी। बीएसए ने इन शिक्षकों को प्रथम बर्खास्तगी नोटिस जारी कर दिया। नोटिस जारी होने के बाद ये शिक्षक कोर्ट चले गए। कोर्ट जाने के बाद इन शिक्षकों को फिर से वेतन जारी होने लगा। कोर्ट में लगभग एक साल तक मामला चलता रहा।
दिसंबर 2018 में एसआइटी ने फिर से पहल की तो निदेशक बेसिक शिक्षा परिषद ने फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के लिए निर्देश दिए। जिले में एक कमेटी गठित हुई जिसने जनवरी 2019 में 80 फर्जी शिक्षकों को अंतिम बर्खास्तगी नोटिस जारी किए।
इसके बाद से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। जबकि दूसरे मंडल गोरखपुर में दो दिन पहले ही एसआईटी जांच में फर्जी पाए गए शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है।
बर्खास्तगी नोटिस जिले के 80 शिक्षकों को पहली बार नवंबर 2017 में जारी किए गए थे। तब इनकी संख्या 82 थी। नोटिस पहुंचने के बाद ये शिक्षक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट में चली पहल के बाद फिर से दिसंबर 2018 में इन शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए एसआईटी और विभाग ने लिखा। इस दौरान हुई जांच के बाद दो शिक्षकों का नाम एसआईटी ने पत्र भेजकर फर्जी शिक्षकों की सूची से हटा दिया था।
जनवरी 2019 में जारी हुआ दूसरा बर्खास्तगी नोटिस
जनवरी 2019 में इन शिक्षकों को द्वितीय बर्खास्तगी नोटिस जारी किए गए। इसके बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिले में 80 शिक्षक एसआईटी द्वारा फर्जी घोषित किए जाने के बाद भी वेतन उठा रहे हैं।
एसआईटी से शिक्षकों की जो सीडी प्राप्त हुई थी। उसमें जिला कमेटी ने पूर्व में जांच की थी। जांच के बाद अंतिम बर्खास्तगी नोटिस भी जारी किया गया था। उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया था। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से भी रिपोर्ट मांगी गई थी। इसमें अभी तक कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बनी है। शीघ्र ही उच्चाधिकारियों से बात कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।- विजय प्रताप सिंह, बीएसए