मैनपुरी। तीन साल तक चली कार्रवाई के बाद आखिरकार एसआईटी सूची में शामिल 40 और शिक्षकों की बर्खास्तगी तय हो गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद डॉ.भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने इन शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी घोषित कर दिए हैं। बीएसए कार्यालय में इन शिक्षकों की सेवा समाप्ति के लिए एक बार फिर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
वर्ष 2017 में एसआईटी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-05 में फर्जी तरीके से बीएड करने वाले जिले के 80 शिक्षकों की सूची की सीडी तैयार कर भेजी थी। तीन शिक्षकों को तत्कालीन बीएसए रामकरन यादव ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के दस्तावेज फर्जी मिलने पर वर्ष 2016 में ही बर्खास्त कर दिया था। 77 शिक्षकों में से 74 शिक्षकों को 30 नवंबर 2019 को बीएसए विजय प्रताप सिंह ने सेवा से बर्खास्त कर दिया।
बर्खास्त होने के बाद ये शिक्षक हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने बीएसए को आदेश दिया कि जब तक इन शिक्षकों की डिग्री के संबंध में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय अपनी रिपोर्ट नहीं देता तब तक इन्हें बिना वेतन के कार्य करने दिया जाए। चार शिक्षकों की डिग्री डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने मई में फर्जी घोषित कर दी, जिन्हें बीएसए ने मई में ही बर्खास्त कर दिया था।
हाईकोर्ट के निर्देश पर 30 जुलाई तक विश्वविद्यालय को फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों के संबंध में निर्णय देना था, जिस पर बुधवार को विश्वविद्यालय में हुई बैठक के बाद जिले में कार्यरत 40 और शिक्षकों की डिग्री फर्जी घोषित कर दी गई। बीएसए कार्यालय में जानकारी होते ही इन शिक्षकों की बर्खास्तगी की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
33 टेंपर्ड डिग्री वाले शिक्षकों पर तीन महीने में होगा फैसला
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को टेंपर्ड (अंकों से छेड़छाड़) बीएड डिग्री वाले शिक्षकों के संबंध में छह महीने में निर्णय देने के निर्देश दिए हैं। फर्जी डिग्री वालों को तीन महीने का समय दिया था। तीन महीने का समय पूरा हो चुका है। अब टेंपर्ड बीएड डिग्री वाले शिक्षकों पर विश्वविद्यालय को अगले तीन महीने में जवाब देना होगा। जिले में तैनात 33 शिक्षकों की बीएड डिग्री टेंपर्ड है।
विश्वविद्यालय ने फेक डिग्री वाले शिक्षकों की डिग्री फर्जी घोषित करने की जानकारी मिली है। अभी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। बर्खास्तगी की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पत्र प्राप्त होते ही संबंधित शिक्षकों की बर्खास्तगी कर दी जाएगी।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए