आगरा के हरीपर्वत थाने के बाग फरजाना क्षेत्र में निजी अस्पताल के कर्मचारी भुगतान की नकली रसीदों के जरिये धोखाधड़ी कर रहे थे। सालाना हिसाब करने पर चिकित्सक को इसकी जानकारी हुई। डीसीपी सिटी के निर्देश पर चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
कमलेश टंडन नर्सिंग होम के साझीदार डॉ. अमित टंडन ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस को बताया कि अस्पताल में मरीजों से इलाज व जांच की फीस लेने और रसीद जारी करने की जिम्मेदारी कर्मचारियों पंकज कुमार बघेल और आदित्य सिंह के पास थी। दोनों ने धोखाधड़ी की नीयत से पीडीएफ के माध्यम से भुगतान रसीदों का फर्जी फॉर्मेट तैयार किया और असली रसीद की जगह नकली रसीदें मरीजों को जारी की।
इन रसीदों के आधार पर कुछ भुगतान सीधे अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कराए। आरोपियों ने काफी रकम मरीजों के तीमारदारों से नकद लेकर अपने पास रख ली। भुगतान रजिस्टर में एंट्री की लेकिन कंप्यूटर पर नहीं दर्शाया। जब साल के अंत में ऑडिट हुआ तो पता चला कि आरोपी यह फर्जीवाड़ा जुलाई से दिसंबर तक लगातार कर रहे थे।
19 दिसंबर 2025 को जब कंप्यूटर में दर्ज अल्ट्रासाउंड डाटा का मिलान रजिस्टर से किया गया तो धोखाधड़ी का पता चला। रजिस्टर में उस दिन 32 मरीजों का अल्ट्रासाउंड दर्ज था, जबकि कंप्यूटर में केवल 24 की एंट्री मिली। शेष आठ मरीजों को फर्जी रसीदें दी गई थीं। जब आरोपियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि ओपीडी असिस्टेंट कुमारी अमृता और सस्तिका यादव भी इस धोखाधड़ी में शामिल थीं। आरोपी पंकज कुमार बघेल ने अपनी गलती मानते हुए दो लाख रुपये अस्पताल प्रबंधन को वापस कर दिए हैं। इंस्पेक्टर हरीपर्वत ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर आरोपों की जांच की जा रही है।