सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि यमुनापार के कालिंदी विहार में पैथोलॉजी लैब बदहाल मिलीं। इनमें डॉक्टर नहीं थे। प्रशिक्षित और डिग्रीधारक टेक्नीशियन नहीं थे। झोलाछाप जांच करता था और रिपोर्ट पर संचालक हस्ताक्षर कर देता था। टीम ने कालिंदी विहार स्थित हेल्थकेयर पैथोलॉजी लैब, जीएल पैथोलॉजी लैब को सील कर दिया। इनमें डॉक्टर और जांच करने वाला टेक्नीशियन नहीं मिला। टीम ने पूछा कौन जांच करता है। संचालक जवाब नहीं दे पाए। डॉक्टर के पर्चे पर संचालक ने ही हस्ताक्षर किए थे।
फर्स्ट च्वाइस का स्टाफ तो लैब छोड़कर ही भाग गया। काफी देर तक टीम ने इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया। यहां से रक्त समेत अन्य की जांच रिपोर्ट पर डॉ. मनीष कुमार वार्ष्णेय के पर्चे मिले। हस्ताक्षर और जांच रिपोर्ट भी संदिग्ध है। कालिंदी विहार के ही न्यू लाइफ हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं होने पर ओटी सील की है। नोटिस भी दिए जा रहे हैं।
- हेल्थकेयर पैथोलॉजी लैब : ये डॉ. शबीना अशरफ के नाम से पंजीकृत है। उनके स्थान पर संचालक उमाशंकर लैब चला रहा था। खुद ही डॉक्टर के नाम पर खून-पेशाब की जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करता था। लाइसेंस पर दर्ज डॉक्टर का नंबर भी गलत था।
- फर्स्ट च्वाइस पैथोलॉजी : ये डॉ. मनीष कुमार वार्ष्णेय के नाम से पंजीकृत है। टीम को देखकर संचालक भाग गया। यहां मिली जांच रिपोर्ट में डॉ. मनीष के डिजिटल हस्ताक्षर थे। आसपास पूछने पर बताया कि कोई डॉक्टर नहीं आता, ये खुद ही जांच करता है।
- जीएल पैथोलॉजी लैब : डॉ. अनिल अग्रवाल के नाम से पंजीकृत है, लेकिन ये नहीं मिले। कोई टेक्नीशियन भी नहीं मिला। डॉक्टर के नाम की जांच रिपोर्ट पर संचालक रविकांत हस्ताक्षर कर मरीजों को रक्त समेत अन्य जांच रिपोर्ट दे रहा था।
- न्यू लाइफ हॉस्पिटल : हॉस्पिटल डॉ. मनीष गर्ग के नाम से पंजीकृत था, ये नहीं मिले। संचालक जितेंद्र सिंह मिला। 3 मरीज भर्ती थे, इनको इलाज करने वाले डॉक्टर का नाम नहीं पता था। पैरामेडिकल स्टाफ भी नहीं था। संचालक ने बताया कि डॉक्टर साहब अभी गए हैं। इसकी ओटी सील कर दी है।