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शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़ा: मुख्तार से जुड़े गैंग के तार...इसलिए बेच दिए विदेशी हथियार, अरशद को सताता था ये डर

Sun, 01 Jun 2025 11:15 AM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

हत्या के मुकदमे होने के बावजूद मोहम्मद जैद का वर्ष 2003 में शस्त्र लाइसेंस बन गया। इसी तरह गिरोह के दूसरे आरोपी भूपेंद्र सारस्वत के खिलाफ भी मुकदमे हैं। इस मामले में आगरा पुलिस ने मुकदमों का जिक्र नहीं किया। 
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मोहम्मद जैद खान और मोहम्मद अरशद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने वाले गिरोह के दो सदस्य मोहम्मद जैद और नेशनल शूटर अरशद के मामले में एसटीएफ गहराई से जांच कर रही है। जांच में मोहम्मद जैद के कुख्यात मुख्तार अंसारी से संबंधों की पुष्टि हुई है। भाजपा सरकार में मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद के गिरोहों पर शिकंजा कसा गया था। लेकिन शस्त्र लाइसेंस जारी करने के लिए इनके आपराधिक मामलों को नहीं देखा गया।
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मोहम्मद जैद का शस्त्र लाइसेंस वर्ष 2003 में जारी किया गया था। उसके खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज थे, इसके बावजूद ताजगंज थाना से लगाई रिपोर्ट में शस्त्र लाइसेंस की संस्तुति की गई। उसके भाई नेशनल शूटर अरशद को भी उसी दौरान शूटिंग का शौक लगा। उसने एक-एक करके अपने पांच शस्त्र लाइसेंस बनवाए। विदेशों से हथियार और कारतूस मंगाया करता था। 

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लेकिन भाजपा सरकार आते ही अरशद ने अचानक शूटिंग छोड़ दी और अपने पांचों विदेशी हथियार भी बेच दिए। एसटीएफ की मानें तो कहीं न कहीं अरशद को यह डर था कि कभी मुख्तार अंसारी के परिचितों की जांच हुई तो उसके परिवार की जांच भी हो सकती है। यही कारण रहा कि उसने अपने हथियार बेच दिए। आशंका है कि शूटिंग की आड़ में विदेशी हथियार और कारतूस अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे।

एसटीएफ की जांच में साफ हो चुका है कि मोहम्मद जैद के पिता शेर खान के मुख्तार अंसारी से संबंध थे। मुख्तार अंसारी लंबे समय तक आगरा की सेंट्रल जेल में बंद रहा था। सेंट्रल जेल से सटा हुआ नगला अजीता इलाका है। अवैध हथियारों के तस्करों में दो आरोपी नगला अजीता के ही हैं। 

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पुलिस ने मुख्तार के गुर्गों को आगरा में पकड़ा था। वह आगरा में किराये पर रहते थे। इस काम में अवैध हथियार गैंग के सदस्य ही मदद किया करते थे। शूटर को एसटीएफ जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाएगी। उसने किस शूटिंग रेंज में प्रैक्टिस की। खाली खोखे किस राइफल एसोसिएशन में जमा करवाए, यह सवाल किए जाएंगे।

नवीनीकरण में भी आपराधिक इतिहास नहीं देखा
हत्या के मुकदमे होने के बावजूद मोहम्मद जैद का वर्ष 2003 में शस्त्र लाइसेंस बन गया। इसी तरह गिरोह के दूसरे आरोपी भूपेंद्र सारस्वत के खिलाफ भी मुकदमे हैं। नवीनीकरण के समय भी पुलिस इस बात की संस्तुति करती है कि शस्त्र धारक के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है। इस मामले में आगरा पुलिस ने मुकदमों का जिक्र नहीं किया। आपराधिक इतिहास होने के बाद भी नवीनीकरण हो गया।

फंस सकते हैं कई सफेदपोश लोग
मीडियाकर्मी और गिरोह के अन्य लोगों के कई सफेदपोश लोगों से संबंध रहे हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस की खरीद फरोख्त के मामले सामने आने के बाद उसके नजदीकी परेशान हैं। एसटीएफ अब उसके साथ संपर्क में रहे लोगों से भी पूछताछ कर सकती है। कई राजनेता और कारोबारी जगत के लोग भी इस गिरोह के कई सदस्यों के साथ संपर्क में हैं।
 
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