भीषण गर्मी और उमस के कारण आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 3,006 मरीज पहुंचे, जिनमें बुखार, वायरल संक्रमण, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन के मामले सबसे ज्यादा रहे। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेने तथा हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी है।
भीषण गर्मी और उमस का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार को एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। सुबह से ही पंजीकरण काउंटरों पर लंबी कतार लग गईं। कुल 3,006 मरीजों का उपचार किया गया। ओपीडी में पर्चा बनवाने और चिकित्सकों को दिखाने के लिए मरीजों व तीमारदारों को काफी देर तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। कई स्थानों पर धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी रही।
सबसे अधिक मरीज बुखार, वायरल संक्रमण, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन की शिकायत लेकर पहुंचे। मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि लगातार पड़ रही तेज गर्मी और शरीर में पानी की कमी के कारण डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग, बच्चे और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है। उन्होंने बताया कि कई मरीज कमजोरी, चक्कर आना, अत्यधिक प्यास लगना, उल्टी, दस्त और लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।
उन्होंने सलाह दी कि लोग बिना आवश्यकता दोपहर में घर से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को कपड़े या टोपी से ढकें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और ओआरएस, नींबू पानी, छाछ या अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक धूप में रहने, खाली पेट बाहर निकलने और शरीर में पानी की कमी होने से हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने की भी सलाह दी है।