रेलवे अब एटा के रेलवे स्टेशन को मालगाड़ियों का हब बनाने जा रहा है। यहां अब तक केवल एक ट्रैक बरहन से आगरा तक बिछा हुुआ है। इसके विद्युतीकरण का काम समाप्त होने के कगार पर है। वहीं रेलवे स्टेशन के दक्षिण दिशा की ओर मालगाड़ियों को खड़ा करने के लिए नया ट्रैक बिछाया जाएगा। यहां दो ट्रैक बिछाए जाएंगे, इससे मालगाड़ियां आसानी से खड़ी हो सकें। वहीं प्लेटफार्म की लंबाई बढ़ाई जाएगी और सिग्नलों को दुरुस्त कराया जाएगा।
प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी स्थापना
एटा रेलवे की स्थापना सन 1949 में तत्कालीन देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। मंडल का पुराना रेलवे स्टेशन होने के बावजूद यहां सवारी गाड़ियों का आवागमन ज्यादा नहीं रहा। एक मात्र पैसेंजर ट्रेन बरहन से एटा तक आती और जाती है। हालांकि इस एक मात्र सवारी गाड़ी से जलेसर और अवागढ़ सहित ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बड़ी सहूलियत रहती है। यह बात अलग है कि कोरोना संक्रमण काल से यह ट्रेन बंद चल रही है।
उत्तर मध्य रेलवे के जूनियर इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मालगाड़ियों में वैगन की संख्या ज्यादा होती है, इससे उनकी लंबाई ज्यादा हो जाती है। अभी तक एटा में रेलवे ट्रैक की लंबाई कम है, केवल रेलवे स्टेशन के सामने ही दो ट्रैक हैं जिन पर मालगाड़ियां खड़ी हो पाती हैं। इनके सिग्नल भी सवारी गाड़ियों के अनुसार लगाए गए हैं। डीआरएम मोहित चंद्रा के आदेश के बाद अब दक्षिण दिशा की ओर रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर रेलवे द्वारा दो ट्रैक बनाए जाएंगे। जहां मालगाड़ियां आराम से खड़ी हो सकें।